Tag - Jain Wisdom

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धर्म और आत्मा का असली स्पर्श तब होता है, जब मनुष्य भीतर से बदलने को तैयार होता है : चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए – आचार्य विनिश्चयसागर

रामगंजमंडी में आयोजित जैन धर्मसभा में आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी ने मनुष्य के आचरण और मूल्यों को केंद्र में रखकर संयम और सच्चाई की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने...

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स्वाध्याय, अनुशासन, आरोग्यता और पर्यावरण रक्षा को बताया जीवन का सच्चा धन ; देव, शास्त्र, गुरु, धर्म और मंदिर की रक्षा शक्ति अनुसार करें धार्मिक कार्य – आचार्य वर्धमान सागर जी

टोंक में धर्मसभा के दौरान आचार्य वर्धमान सागर जी ने आरोग्यता, शास्त्र स्वाध्याय, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण पर गहन विचार रखे। जीवन में संयम और धार्मिकता से ही...

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