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संयम बंधन नहीं, अभिनंदन का दिन है : संयम के बिना जीवन गाड़ी बिना ब्रेक की तरह – क्षुल्लक जी का संदेश

धरियावद में पर्यूषण पर्व के छठे दिन क्षुल्लक महोदय सागर जी महाराज ने कहा कि संयम बंधन नहीं, बल्कि अभिनंदन का दिन है। संयम जीवन का ब्रेक है, जिसके बिना मनुष्य...

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सुगंध दशमी पर जैन मंदिरों में धूप विसर्जन, झांकियों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों से छाया भक्ति माहौल : संयम की आराधना ही जीवन की श्रेष्ठ साधना – आचार्य श्री निर्भय सागर जी

ललितपुर में पर्युषण पर्व पर आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने कहा कि संयम साधना से ही जीवन में शांति और आनंद का अनुभव होता है। सुगंध दशमी पर नगर के जैन...

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उत्तम तप धर्म का महत्व समझाते हुए प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन का प्रवचन : गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान

अयोध्या में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य ब्रम्हचारी विजय कुमार जैन ने उत्तम तप धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि तप...

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सहारनपुर में दसलक्षण महापर्व पर उत्तम शौच धर्म की प्रभावना, संतोष में है जीवन का वास्तविक सुख : उत्तम आर्जव धर्म मानव दुःखी है पदार्थ से नहीं, लोभ से – आचार्य श्री विमर्शसागर

सहारनपुर में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने उत्तम शौच धर्म की महत्ता समझाते हुए कहा कि मनुष्य दुःखी पदार्थ...

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पर्वाधिराज पर्यूषण के दूसरे दिन मनाई गई उत्तम मार्दव धर्म की आराधना : मुनि साध्यसागर व मुनि विश्वसूर्यसागर महाराज ने दिए मंगल प्रवचन

सनावद में पर्वाधिराज पर्यूषण के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। मुनि साध्यसागर जी महाराज व मुनि विश्वसूर्यसागर जी महाराज ने अहंकार त्याग और...

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सहारनपुर में 30 पीछीधारी संतों का दुर्लभ सानिध्य : आपका अभिमान बताता है, आप गुणवान नहीं हैं – आचार्य विमर्शसागर जी

सहारनपुर में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य यदि अपने छोटे-से गुणों पर अभिमान करता है तो वह वास्तविक गुणवान...

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मन और वचन में अंतर तिर्यंच गति का कारण है : मायाचारी से बचना जरूरी है – आचार्य विनिश्चय सागर महाराज

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंच गति का कारण बनती है। मन में कुछ और वचन में कुछ कहना...

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आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय सात राजू ऊपर स्थित है : विनयसंपन्नता भावना मोक्ष का द्वार है – आचार्य श्री की मंगल देशना

टोंक में सोलहकारण भावना पर्व के अंतर्गत आज दूसरी विनयसंपन्नता भावना का दिवस मनाया गया। आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में विनय को मोक्ष का द्वार बताते हुए...

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धर्म और आत्मा का असली स्पर्श तब होता है, जब मनुष्य भीतर से बदलने को तैयार होता है : चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए – आचार्य विनिश्चयसागर

रामगंजमंडी में आयोजित जैन धर्मसभा में आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी ने मनुष्य के आचरण और मूल्यों को केंद्र में रखकर संयम और सच्चाई की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने...

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आत्मविश्वास, मंत्र शक्ति और निर्मल भावों पर दिया ज्ञानवर्धक प्रवचन; निर्मल परिणाम जीवन को भी निर्मल बनाते हैं – आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी

रामगंजमंडी में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि यदि हमारे परिणाम निर्मल होंगे तो जीवन भी निर्मल होगा। उन्होंने आत्मविश्वास, मंत्र जाप...

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