Tag - jain philosophy

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उत्तम क्षमा धर्म पर सहारनपुर में दिया मंगल संदेश : क्रोध समस्या है, क्षमा हर समस्या का जीवंत समाधान है – आचार्य विमर्श सागर जी

पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर सहारनपुर में दिगम्बराचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने कहा कि क्रोध समस्या का समाधान नहीं बल्कि स्वयं एक समस्या है, जबकि...

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उत्तम क्षमा - आत्मशुद्धि और मोक्ष का प्रथम सोपान : क्षमा वीरस्य भूषणं

उत्तम क्षमा आत्मशुद्धि और मोक्ष का प्रथम सोपान है। यह क्रोध, द्वेष और प्रतिशोध को शांत कर आत्मा को निर्मल बनाती है। क्षमा से मैत्रीभाव व सामाजिक सद्भाव का...

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धर्म जागृति संस्थान का नवम राष्ट्रीय अधिवेशन अहिच्छेत्र अतिशय क्षेत्र में संपन्न : धर्म प्रभावना, समाज हित और जैन जनसंख्या वृद्धि के संकल्प के साथ हुआ समापन

अहिच्छेत्र अतिशय क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) में आयोजित धर्म जागृति संस्थान के नवम राष्ट्रीय अधिवेशन में आचार्य श्री 108 वसुनंदी महाराज के सान्निध्य में धर्म...

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दसलक्षण महापर्व धर्म के दस लक्षणों से जीवन और समाज में शान्ति स्थापित करता है : विश्व शान्ति का आधार है दसलक्षण महापर्व – आचार्य विमर्श सागर जी

आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ने कहा कि दसलक्षण महापर्व केवल जैनों का पर्व नहीं है बल्कि यह सम्पूर्ण मानव समाज के लिए जीवनोपयोगी है। धर्म के दस लक्षण...

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विदेश में जैनधर्म की प्रभावना करेंगे डॉ. जीवन प्रकाश जैन : अमेरिका में 15 दिवसीय प्रवास कर देंगे जैनधर्म का संदेश

अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन 15 दिवसीय अमेरिका प्रवास पर जैनधर्म की प्रभावना हेतु रवाना हुए। उन्हें जैन समाज...

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विनिश्चय सागर महाराज ने प्रवचन में दी मन की सफाई की सीख : बोले-काम बिगड़ता है जब मन बिगड़ता है 

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने रविवार को मंगल प्रवचन में कहा कि जीवन की सारी समस्याएँ मन से जुड़ी हैं। जब मन बिगड़ता है तो काम भी...

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मुरैना में आज होगा तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन, जैन मुनियों का मिलेगा मार्गदर्शन : जैन तीर्थंकरों के जीवन चरित्र पर आधारित प्रश्नोत्तरी में हर उम्र के साधर्मी ले सकेंगे भाग

मुरैना में रविवार 24 अगस्त को बड़े जैन मंदिरजी में शाम 6 से 7 बजे तक तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित होगी। युगल मुनिराज मुनिश्री विलोकसागर जी व...

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कालजयी रचना ‘मेरी भावना’: 109 वर्षों बाद भी प्रासंगिक : पं. जुगल किशोर मुख्तार “युगवीर” की अमर कविता ने दिखाया जीवन मार्ग

1916 में रचित पं. जुगल किशोर मुख्तार “युगवीर” की कविता ‘मेरी भावना’ आज 109 वर्षों बाद भी उतनी ही प्रासंगिक है। यह रचना राष्ट्रीयता, विश्व बंधुता, सहिष्णुता और...

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मूर्छा भाव व्यक्ति को नियम संयम से दूर करता है : मनुष्य जन्म को साधना और धर्म से सार्थक करें – आचार्य श्री

आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने रामगंजमंडी में प्रवचन देते हुए कहा कि मोह और मूर्छा भाव के कारण मनुष्य धर्म और संयम से भटक जाता है। मनुष्य जन्म को धर्म...

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इच्छाओं के गुलाम बन चुके हैं लोग, मन की स्वतंत्रता ही असली स्वराज : देश आज़ाद, पर मन की बेड़ियों में बंधे – मुनि प्रमाण सागर

भोपाल के विद्या प्रमाण गुरुकुलम में स्वतंत्रता दिवस पर मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि असली आज़ादी सत्ता नहीं, बल्कि मन और इच्छाओं पर नियंत्रण है। उन्होंने युवाओं...

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