ललितपुर में पर्युषण पर्व के दौरान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि तप आत्मा को निर्मल बनाता है और इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी साधना है।...
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दसलक्षण पर्व के छठे दिन आचार्य वर्धमान सागर जी ने कहा कि आत्मा की उन्नति और तीर्थंकर पद की प्राप्ति के लिए संयम रूपी ऊर्जा शक्ति अत्यंत आवश्यक है। संयम जीवन का...
मुरैना के बड़े जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म का महत्व समझाया गया। मुनिश्री विलोकसागर ने सत्य बोलने और आत्मा की पवित्रता पर जोर...
उत्तम क्षमा आत्मशुद्धि और मोक्ष का प्रथम सोपान है। यह क्रोध, द्वेष और प्रतिशोध को शांत कर आत्मा को निर्मल बनाती है। क्षमा से मैत्रीभाव व सामाजिक सद्भाव का...
आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने रामगंजमंडी में प्रवचन देते हुए कहा कि मोह और मूर्छा भाव के कारण मनुष्य धर्म और संयम से भटक जाता है। मनुष्य जन्म को धर्म...
अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का एक मई को दस वां दीक्षा दिवस है। इस अवसर पर पढ़िए यह विशेष आलेख कि कैसे बालक चक्रेश निकला धर्म की राह पर और बन गया मुनि...
ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक के शुभ अवसर पर मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की...
ऋषभदेव भगवान के निर्वाण कल्याणक के शुभ अवसर पर मासिक व्याख्यान माला में जे.ए.एस और श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे तीर्थंकर आदिनाथ की...
श्री दिगंबर जैन समाज के द्वारा पूज्य आर्यिका 105 विभाश्री माता जी के मंगल सानिध्य में जैन धर्म के आठवें तीर्थकर देवाधिदेव 1008 चंदप्रभु भगवान और 23 वें...








