धर्म और तप के मार्ग के अनुयायी नागपुर अजनी के निवासी अमरचंद जयचंद सिंघवी 95 वर्ष की उम्र में दूसरी बार 32 उपवास करने जा रहे हैं। कल उनका 19वां उपवास था। पढ़िए...
Tag - discourse
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जीवन संयम, तप, करुणा और धर्मप्रभावना का अद्वितीय उदाहरण है। 75वें जन्मदिवस पर उनका यह जीवनवृत्त समाज के लिए प्रेरणा...
– निष्कर्ष दशलक्षण महापर्व केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर है। क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, दान और ब्रह्मचर्य- ये सभी...
जयपुर बसने के पहले पुरानी राजधानी आमेर को जैन नगरी भी था। यहां पर बने अति प्राचीन जैन मंदिर इस बात के गवाह रहे है कि इनमें कठोर साधना और तपस्या करने वाले जैन...
श्रीक्षेत्र अरिहंतगिरी के भट्टारक धवलकीर्ति जी स्वामी ने कहा कि कि धर्मस्थल का प्रमुख मंदिर शिव मंदिर (मंजुनाथ स्वामी) है, जिसका संचालन और संरक्षण हेगड़े...
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि पर्युषण पर्व में एक बार संत का जीवन जीकर देखो, तब समझ आएगा कि वास्तव में संतजीवन क्या होता है और चर्या...
हमारे वीतरागी संत केवल अपना ही नहीं, बल्कि समस्त जीव जगत का कल्याण करते हैं। समाज और राष्ट्र को उनका योगदान अतुलनीय है। बीसवीं शताब्दी में इस परंपरा के...
अंतरराष्ट्रीय दिगंबर जैन पोरवाड़ सामाजिक मंच का वार्षिक अधिवेशन एवं साधारण सभा रविवार, 24 अगस्त को मोदीजी की नसिया, बड़े गणपति, इंदौर में आयोजित हुई। यह आयोजन...
दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...
दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...








