दिगंबर जैनाचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य युगल मुनि श्री अपूर्व सागर जी, मुनिश्री अर्पित सागर जी और क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज का ससंघ गत...
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परम पूज्य वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश दिगंबर जैनाचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के सुशिष्य युगल मुनिराज श्री अपूर्व सागर जी महाराज, मुनि श्री अर्पित...
वात्सल्य वारिधि दिगंबर जैन आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के युगल शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री...
वात्सल्य वारीधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म का मूल दया है। वीतराग धर्म के अलावा संसार में अन्य...
अन्याय और अधर्म इस लोक के साथ ही परलोक में भी दुख देने वाले हैं।धर्म के बिना इंसान चलती फिरती लाश के समान है । धर्म को ज्ञानी लोगों ने संचय किया है। धर्म को...
वात्सल्य वारीधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री अपूर्व सागर जी महाराज ने कहा कि वीतराग धर्म, आत्मधर्म, केवली भगवान द्वारा कहा गया धर्म...
मुनि श्री अपूर्व सागर ने चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन धर्म, वीतराग धर्म, सुख की खान है। यह सभी का हित करने वाला होता...
मुनि श्री अपूर्व सागर ने चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिन धर्म, वीतराग धर्म, सुख की खान है। यह सभी का हित करने वाला होता...
जिन दर्शन, जिनाभिषेक, जिन पूजन, जिन भक्ति, तीर्थ यात्रा करना, आहार दान देना आदि यह कार्य पुण्यशाली और सौभाग्यशाली जीव ही कर सकते हैं। ये सब कार्य नहीं करने...
वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनि अर्पित सागर ने कहा कि जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र से सहित होता है, वह...








