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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 26वें काव्य पर दिया व्याख्यान

धर्मसभा में उपाध्याय श्री विहसंतसागर महाराज ने कहा कि जो भी जीव जन्म लेता है, उसके साथ कर्म साथ में जरूर आते हैं। ज्ञानवरण आदि आठ कर्म जीव को दुःख देते हैं और...

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दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन का 30वां स्थापना दिवस : डबरा शाखा ने किया पूजा प्रक्षालन एवं सामूहिक भोज का आयोजन

दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के 30वें स्थापना दिवस पर 30 जुलाई को दिगंबर जैन सोशल ग्रुप डबरा के सदस्यों ने श्री 1008 दिगंबर महावीर जैन मंदिर में पूजा...

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जैन मिलन वर्धमान की ओर से आयोजन : गरीब बच्चों को वितरित की गई स्टेशनरी

जैन मिलन वर्धमान ने शासकीय विद्यालय में बच्चों को स्टेशनरी वितरित की। जैन मिलन वर्धमान की क्षेत्रीय संयोजिका सरिता जैन ने बताया कि जैन मिलन की सभी सदस्याओं ने...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : समझाया भक्तामर के 19वें काव्य का महत्व

मुनि श्री विहसंतसागर महाराज ने कहा कि हमें कभी भी मंदिर की द्रव्य का हरण नहीं करना चाहिए यदि कोई ऐसा करता है तो उसका पुण्य क्षीण हो जाता है। पढ़िए यह विशेष...

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जैन मिलन स्वतंत्र की ओर से आयोजन : गरीब बच्चों को वितरित की गई जरूरत की सामग्री

जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा शासकीय माध्यमिक विद्यालय पठर्रा डबरा से लगभग 9 किलोमीटर दूरी पर निर्धन गरीब छात्र एवं छात्राओं को जरूरतमंद स्टेशनरी पाठ्य सामग्री...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : समझाया भक्तामर के 18वें काव्य का महत्व

मुनि श्री विहसंतसागर महाराज ने कहा कि हमें कभी भी किसी की पड़ी हुई, रखी हुई वस्तु को नहीं उठाना चाहिए क्योंकि जैन आगम में आचार्य भगवंत ने कहा है कि आचौर्य...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : बाल संस्कार पाठशाला का हुआ आयोजन

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि हमें भगवान की पूजन अष्ठ द्रव्य से करनी चाहिए और हमें मंदिर में तीन बार परिक्रमा देते समय देव स्तुति बोलनी...

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नारी के उत्थान पर बोले उपाध्याय श्री विहसंतसागर महाराज : नारी का उत्थान तो भगवान ऋषभदेव के समय से चला आ रहा है

आरोग्यमय वर्षायोग समिति द्वारा आचार्य विराग सागर मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 12वें काव्य का बताया महत्व

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि जो जितना परिग्रह रखता है, उसे उतने ही विकल्प ज्यादा आते हैं। जगत के संकल्प ही विकल्पों का जनक है। यदि...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : भक्तामर के 11वें काव्य का बताया महत्व

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि देह को कृष करने वाले धर्म बहुत जन करते हैं, लेकिन तत्व का निर्णय करके तप करना वास्तविक तपस्या है। जिसने तन...

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