उस समय समवशरण की रचना का वर्णन आता है जिससे तीर्थंकर भगवान धर्म देशना देते हैं। वर्तमान में समवशरण नहीं है, अब जिनालय का निर्माण किया जाता है। यह मंगल देशना...
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आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश हुआ। कर जिनवाणी भेंट की।...








