Tag - Article श्रीफल जैन न्यूज

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आध्यात्मिक साधना का अद्वितीय जीवनवृत्त : संयम, तप और वात्सल्य के प्रतीक हैं आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जीवन संयम, तप, करुणा और धर्मप्रभावना का अद्वितीय उदाहरण है। 75वें जन्मदिवस पर उनका यह जीवनवृत्त समाज के लिए प्रेरणा...

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फादर्स डे पर विशेष पिता के स्नेह और समर्पण को समर्पित दिन : “पिता: जीवन की जड़, संत: जीवन की दिशा”

फादर्स डे एक विशेष दिन है जो पिता के प्रेम, त्याग और मार्गदर्शन को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। यह दिन हमें अपने पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का...

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लोकोपकारी परम प्रभावक तीर्थंकर पार्श्वनाथ : व्यापक व्यक्तित्व संपूर्ण देश में अत्यंत लोकप्रिय जननायक

जैन परंपरा में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव से लेकर अन्तिम तीर्थंकर महावीर स्वामी तक के इन चौबीस तीर्थंकरों की गौरवशाली परंपरा में बनारस नगरी में जन्मे सप्तम तीर्थंकर...

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2 अक्टूबर महात्मा गांधी की जंयती पर विशेष लेखः अहिंसा के पुजारी थे महात्मा गांधी ‘दे दी हमें आजादी, बिना खड्‍ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।’ 

आज गांधीजी हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके आदर्श सिद्धांत हमें सदैव याद रहेंगे। उनका नाम अमर रहेगा। मनुष्य पर किसी ना किसी धर्म, व्यक्ति का प्रभाव अवश्य रहता...

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पर्यूषण महापर्व 8 सितम्बर से 17 सितंबर 2024 पर विशेष : दसलक्षण महापर्व : विकारों से मुक्ति के दस उपाय

दसलक्षण महापर्व जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे जैन धर्मावलंबियों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व दस दिनों तक चलता है और...

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जैन साधु चलते- फिरते भगवान : ऐसे होते हैं दिगम्बर जैन साधु-संत-डॉ. अरविंद जैन

जैन साधु के प्रति सारा विश्व नतमस्तक क्यों होता है? जैन साधु की कुछ विशेषताओं पर महावीर सर्वोदय मासिक पत्रिका के संपादक एवं अखिल भारतीय जैन संपादक संघ के...

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सर सेठ हुकमचंदजी के जन्मदिवस 14 जुलाई पर विशेष : यश-कीर्ति और गौरव के शिखर पुरुष रहे हैं सर सेठ हुकम चंद

14 जुलाई, 1874 को इंदौर में जन्मे और 26 फरवरी, 1959 को स्वर्गवासी हुए सर सेठ हुकम चंद जी अपने समय में मालवा के वैभव संपन्न धन कुबेर और जैन जैनेत्तर समाज के...

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बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ सही संस्कार देना जरूरी : अपने बच्चों को संवेदनशील बनाइए

आपके हर छोटे-बड़े काम के लिए दौड़े आने वाले बच्चे, उन करियर सजग बच्चों से कहीं अधिक तवज्जो और सम्मान के हकदार हैं। अपने बच्चों को “संवेदनशील”...

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महावीर जन्मकल्याणक पर विशेष : विश्व को आवश्यकता भगवान् महावीर स्वामी की

सम्प्रति काल में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्चर्य की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी भगवान् महावीर स्वामी के काल में थी। पूर्व में धर्म के नाम से हिंसा होती थी।...

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