अपने गुणों को ही संसार में सर्वश्रेष्ठ समझकर औरों को दीन, हीन, नीच, कमजोर समझना और देखना अहंकार की श्रेणी में आता है। उक्त विचार सप्तम पट्टाचार्य श्री...
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छाणी परंपरा के सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज ने ज्ञानतीर्थ मुरैना की पावन धरा पर वर्षायोग कलश स्थापना समारोह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि...
संयम के मार्ग पर चलने को आतुर दीक्षार्थी ब्र. नवीन भैयाजी की गोद भराई का महोत्सव जैन मंदिर धौलपुर में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी...
सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज एवं मुनिश्री ज्ञातसागर जी महाराज तीर्थवन्दना हेतु मुरैना से अतिशय क्षेत्र श्री महावीरजी पहुंचे थे। अतिशय क्षेत्र में...








