Tag - Aacharya Vardman Sagar

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आत्मा में निर्मल गुणों के समीचीन ज्ञान प्रकट करने की क्षमता और दृढ़ता है: आचार्य श्री वर्धमान सागर की मंगल देशना

सम्यक ज्ञान समीचीन ज्ञान है। समीचीन ज्ञान स्वाध्याय तप संयम के माध्यम से अपनी शक्ति सामर्थ्य को प्रकट करें। इससे सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र प्राप्त होता है।...

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देव शास्त्र गुरु धर्म का समागम प्राप्त कर उनके प्रति श्रद्धा बनाकर धर्म की वृद्धि करें: आचार्य श्री वर्धमान सागर की मंगल देशना 

आप बहुमंजिला इमारतों में रहते हैं, लेकिन तीन खंड वास्तविक मकान को आप भूल रहे हैं। पहला खंड हमारी आत्मा, दूसरा खंड शरीर, और तीसरा खंड मन। इसमें आत्मा प्रथम खंड...

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धर्म को धारण कर मानव जीवन को सार्थक करें: आचार्य श्री वर्धमान सागर की मंगल देशना

जगत परिवर्तनशील है। हम पर्यावरण पानी की उपेक्षा का परिणाम देख व भोग रहे हैं। पानी सबके लिए जरूरी है विश्व में भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है। हमें पानी का महत्व...

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