Tag - हिन्दी साहित्य

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 34 संत ब्रह्म अजित 17वीं शताब्दी के संत थे: भृगुकच्छपुर (भडोच) के नेमिनाथ चैत्यालय में हनुमच्चरित की थी समाप्त 

राजस्थान की धरती पर जिन जैन संतों ने अपने साहित्य के माध्यम से संयम, नियम और धर्म के प्रति जनमानस में अलख जगाई है। उसी का प्रतिफल है कि जैन धर्म और भगवान...

समाचार

राजस्थान के जैन संत 33 भट्टारक रत्नचंद्र (प्रथम) ने तीर्थंकर भगवानों का किया गुणानुवाद: भट्टारक सकलचंद्र के शिष्य की रचना रही श्रेष्ठ

राजस्थान की धरती जैन संतों के जन्म और उनके धर्म के प्रति किए गए कर्म के लिए जानी जाती है। राजस्थान में सर्वाधिक जैन संतों की लंबी विरासत रही है। इनमें से कई तो...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 32 संत श्री त्रिभुवन कीर्ति ने अपने रास में रोमांचक घटनाओं को संजोया: राजस्थान के जैन संतों की परंपरा में श्रेष्ठ विद्वान थे त्रिभुवन कीर्ति 

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व और कृतित्व श्रंखला में राजस्थान की धरती पर हुए जैन संतों ने बहुत सा साहित्य रचा। वही साहित्य आज गुरु-शिष्य परंपरा का अलग महत्व...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 31 जैन संत संयमसागर जी का साहित्य में रहा बड़ा योगदान: गुरु वंदना से लेकर भगवान की भक्ति के पदों की रचना 

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व और कृतित्व श्रंखला में आज जैन संत श्री संयमसागर जी के बारे में जानते हैं। संत श्री संयमसागर जी भट्टारक कुमुदचंद्र के शिष्य थे।...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 30 ब्रह्म गणेश ने अपने गुरुजनों का परिचय किया प्रस्तुत: इतिहास को मोड़ने का किया कार्य

राजस्थान के जैन संत: व्यक्तित्व और कृतित्व के माध्यम से संतों और साधुओं के जीवन और उनके काल में हुए जैन धर्म के प्रति जनजागरण के बारे में जान रहे हैं। ऐसे...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 29 आगम काव्य, पुराण, नाटक छंद शास्त्र के वेत्ता थे संत श्री सुमति सागर: अभयनंदी एवं रत्नकीर्ति दोनों के स्तवन गीत लिखे

राजस्थान में जैन संतों ने आगम काव्य, पुराण, नाटक और छंद लिखे। इसमें गुरुओं के स्तवन किया गया। संत श्री सुमति सागर ऐसे संत रहे, जिन्होंने दो भट्टारकों का काल...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 28 धर्म आराधना के साथ गुरु वंदना कर साहित्य की रचना का दौर: ब्रह्म जयराज ने अपनी रचना में गुरु छंद लिखे

राजस्थान के जैन संतों ने अपने गुरुओं की कीर्ति का खूब बखान किया है। राजस्थान की धरती पर जैन संतों की स्थापित परंपरा में कई संतों ने अपने लेखन के माध्यम से जैन...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 27 राजस्थान और गुजरात में समान रूप से धर्म प्रभावना हुई: भट्टारक अभयनंदी के छंदों में मिलता इनका बखान

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व एवं कृतित्व के तहत राजस्थान में जन्में, यहीं पर संत बने और यहीं की भाषा में साहित्य की रचना कर जन-जन तक धर्म प्रभावना पहुंचाने...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 26 ब्रह्म धर्मरुचि ने गुजराती मिश्रित राजस्थानी में रचना कर भक्ति का दिया संदेश: भट्टारक अभयचंद्र जी के शिष्य थे ब्रह्म धर्मरुचि

राजस्थान के जैन संतों के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में पढ़ने के बाद एक बात तो स्पष्ट है कि राजस्थान के धरती पर जितने भी संतों ने जन्म लिया। उन्होंने...

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 24 ब्रह्म गुणकीर्ति की रचनाधर्मिता से समृद्ध हुआ राजस्थान का शास्त्र भंडारः रामसीता रास के माध्यम से सिद्ध की अपनी विद्वत्ता

राजस्थान में जैन संतों की कड़ी बहुत लंबी है। इनमें एक से एक उद्भट्ट विद्वान सामने आए हैं। जिन्होंने न केवल साहित्य सृजन कर शास्त्रों को समृद्ध किया है बल्कि जैन...

You cannot copy content of this page