भारतीय मनीषा के इस यथार्थपरक श्लोक में जीवन का वह नग्न सत्य प्रतिध्वनित होता है, जिसे समाज प्रतिदिन देखता तो है, किंतु स्वीकार करने में संकोच करता है। संसार का...
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मुनिश्री विलोकसागर जी ने कर्म, भाग्य, पुरुषार्थ और भाव नियंत्रण के बारे में प्रवचन के दौरान श्रावकों को उपदेश दिए। वे मुरैना के बड़ा जैन मंदिर में धर्मसभा को...








