Tag - आर्यिका सरस्वती माताजी

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समाजजनों ने दी एक-दूसरे को बधाई: आर्यिका संघ के सानिध्य में भगवान महावीर स्वामी का 2551वां निर्वाणोत्सव मनाया 

भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर हैं। महावीर स्वामी ने कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन स्वाति नक्षत्र में कैवल्य ज्ञान प्राप्त करके निर्वाण...

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यह आयोजन मानव से महामानव और आत्मा से परमात्मा बनने का प्रतीक : आर्यिका सरस्वती माताजी के सानिध्य में शांति नाथ मंडल विधान का आयोजन

 नगर में चातुर्मासरत आर्यिका सरस्वती माताजी के सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिरजी में शांति नाथ मंडल विधान का आयोजन किया गया। इस विधान को...

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आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के सानिध्य में हुआ कार्यक्रम : आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर किया ध्वज वंदन

जैन जगत के सर्वोच्च मुनिराज, बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती, आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव वर्ष के...

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9 दिवसीय मंडल विधान की शुरुवात कल्याण मंदिर स्त्रोत विधान से हुई ः 44 अर्घ्य समर्पित किए गए

नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी के सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में 9 दिवसीय मंडल विधान की शुरुवात आश्विन सुदी एकम को प्रातः पंचामृत अभिषेक...

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नव दिवसीय मंडल विधान 3 अक्टूबर से : प्रतिदिन एक ही मांडने पर होंगे अलग-अलग विधान

सनावद नगर में चातुर्मासरत गणीनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के सानिध्य में 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में 9 दिवसीय विधान...

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पर्युषण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म भक्तिभाव से मनाया : अनंत चतुर्दशी पर्व पर हुई धर्म प्रभावना

 पर्युषण पर्व के अंतिम दिन भादौ मास शुक्ल पक्ष चौदस को उत्तम ब्रह्मचर्य वर्त के दिन अनंत चतुर्दशी पर्व बड़ी भक्ति भाव से मनाया गया। आर्यिका सरस्वती माताजी ने...

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जलविहार का कार्यक्रम होगा : संपूर्ण परिग्रह का त्याग करना आकिंचन्य धर्म है

 किंचन्य आत्मा की उस दशा का नाम है जहां पर बाहरी तो सब कुछ छूट जाता है किंतु आंतरिक संकल्प विकल्प भी शांत हो जाते हैं। चतुर्मास रत आर्यिका सरस्वती माताजी ने...

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उत्तम त्याग धर्म पर हुई धर्म प्रभावना : सच्चे मन से कषाय और मिथ्यात्व का त्याग करना उत्तम त्याग धर्म है- आर्यिका सरस्वती माता जी

त्याग शब्द से ही पता लग जाता है कि इसका मतलब छोड़ना है और जीवन को संतुष्ट बना कर अपनी इच्छाओं को वश में करना है! यह न सिर्फ अच्छे गुणवान कर्मों में वृद्धि करता...

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तप ही कर्म निर्जरा का साधन : पर्वाधिराज दसलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना

उत्तम तप पर प्रकाश डालते हुए आर्यिका सरस्वती माताजी ने बताया कि तपस्या से हम इच्छाओं को खत्म करें तो कर्मों का क्षय होकर उनकी निर्जरा होगी। पढ़िए सन्मति जैन...

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प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय दमन करना संयम है : उत्तम संयम धर्म के दिन सुगंध दशमी पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया

नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी के निर्देशन में बड़ी भक्ति भाव से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के छठे दिन प्रातः बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत...

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