Tag - मोक्ष मार्ग

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सहारनपुर में दशलक्षण पर्व पर आचार्य श्री ने बताया त्याग का महत्व : संग्रहवृति दुःख का कारण है, “उत्तम त्याग धर्म” सुख का मार्ग – आचार्य विमर्शसागर

सहारनपुर में दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि संग्रहवृति दुःख का कारण है और त्याग धर्म ही जीवन को सुखी बनाता है। निस्वार्थ दान और...

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उत्तम संयम धर्म दिवस पर सनावद में सुगंध दशमी का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया : युगल मुनिराज सान्निध्य में भक्तों ने धूप खेवन कर धर्मलाभ

सनावद में पर्युषण पर्व के छठे दिन सुगंध दशमी का पर्व बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया गया। युगल मुनिराज के सान्निध्य में पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा और धूप खेवन...

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शौच धर्म पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का प्रेरक प्रवचन: लोभ त्याग ही सच्चा शौच धर्म है 

विरागोदय तीर्थ पथरिया में पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का मंगल चातुर्मास जारी है। धर्मसभा में उन्होंने कहा कि शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी...

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उत्तम आर्जव धर्म पर प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन का सारगर्भित प्रवचन : गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान

अयोध्या में विराजमान गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी के ससंघ ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि मन, वचन और काय...

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आगरा के शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व का शुभारंभ, उत्तम मार्दव धर्म की हुई आराधना : श्री पुष्पदन्त और चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक, समाज ने किया मंगल पूजन

आगरा के शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना बड़े भक्तिभाव से की गई। इस...

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झुमरी तिलैया में दशलक्षण पर्व का दूसरा दिन, उत्तम मार्दव धर्म की हुई आराधना : निर्मला दीदी ने प्रवचन में समझाया – अहंकार त्याग ही है जीवन की सरलता का मार्ग

झुमरी तिलैया में दशलक्षण पर्यूषण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाया गया। मंदिरों में अभिषेक-शांतिधारा के साथ प्रवचनों और सांस्कृतिक...

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अभिमान त्यागने से ही मिलता है आत्मिक सुख और शांति : अहंकार विष के समान, मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है – पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी

पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...

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उत्तम क्षमा - आत्मशुद्धि और मोक्ष का प्रथम सोपान : क्षमा वीरस्य भूषणं

उत्तम क्षमा आत्मशुद्धि और मोक्ष का प्रथम सोपान है। यह क्रोध, द्वेष और प्रतिशोध को शांत कर आत्मा को निर्मल बनाती है। क्षमा से मैत्रीभाव व सामाजिक सद्भाव का...

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आचार्य वर्धमान सागर बोले-वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से संवेग भावना जाग्रत होती है: 15 अगस्त का संदेश — जैसे देश आज़ाद हुआ, वैसे ही आत्मा को भी कर्म बंधन से मुक्त कराना है

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 16 कारण भावना अंतर्गत संवेग भावना की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से ही सच्चा...

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परम पूज्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का केशलोच : रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में हुआ अद्वितीय तप का प्रदर्शन

रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने हाथों से केशलोच कर अद्वितीय साधना का प्रदर्शन किया। दिगंबर परंपरा के इस...

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