Tag - धर्मसभा

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विश्व शांति की बात सब करते पर वास्तविक शांति है कहां : आचार्य श्री विशद सागर जी ने समर्थ सिटी में धर्मसभा में दिए उपदेश

आचार्य श्री विशद सागर जी ने समर्थ सिटी में स्मृतिनगर से विहार कर पहुंचे। यहां पर जैन समाज के श्रद्धालुओं को संबोधित किया। धर्मसभा में आत्म ज्ञान और आत्म कल्याण...

दोहों का रहस्य समाचार

दोहों का रहस्य -95 आत्मा सच्चे अर्थों में परम सत्य को प्राप्त कर लेती है, तो व्यक्तित्व का ‘मैं’ मिट जाता है : जीवन की गहराइयों में उतरें, सत्य की खोज करें

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

दोहों का रहस्य समाचार

दोहों का रहस्य -94 ईश्वर की कृपा हमेशा समान बरसती है : मन भीतर से विनम्र, सहज और खुला रखें

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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50 वर्ष बाद हुआ क्षेत्र में पंचकल्याणक, अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का भी बुधवार को होगा सनावद के लिए विहार : आचार्य श्री विशुद्ध सागर का सिद्धवरकूट से इंदौर के लिए मंगल विहार

इंदौर संभाग के सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट में आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित तीन दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव का समापन मंगलवार को मोक्ष...

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साधु का महत्व वैभव से नहीं वीतरागता से -उपाध्यक्ष श्री विश्रुत सागर: श्रद्धालुओं ने प्रवचन में जाना नमस्कार का महत्व

छत्रपति नगर के दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी ने सोमवार को धर्मसभा संबोधित की। साथ ही मुनिश्री निर्वेद सागर जी महाराज ने भी संयम और...

दोहों का रहस्य समाचार

दोहों का रहस्य -93 जीवन में अहंकार, दिखावा और अत्यधिक भोग का कोई स्थायी मूल्य नहीं है : हमेशा ईश्वर की शरण में जाने की कोशिश करें

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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कूट के नाम से प्रसिद्ध भारत का एक मात्र तीर्थ सिद्धवरकूट-आचार्य विशुद्ध सागर जी: पं.राकेश जैन भिंड ने 7 प्रतिमा के व्रत अंगीकार किए 

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने सोमवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए बद्ध चेतन, अबद्ध चेतन, सदभूत-असदभूत व्यवहारनय को समझाया। आचार्यश्री ने युवाओं को भी...

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जोबनेर में साध्वी श्री मधुरेखा जी का मंगल प्रवेश: समाजजनों ने साध्वी वृंद का स्वागत कर अगवानी की 

तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण जी की साध्वी श्री मधुरेखा जी और उनकी साध्वी वृंद का मंगल प्रवेश धर्म नगरी में भव्य जुलूस के साथ हुआ। इस अवसर पर जयघोष...

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अच्छी संगति से सद्गुण, विनम्रता और आत्मिक उन्नति होती है : बुरी संगति से पतन, अहंकार और मोह का विस्तार होता है

दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन...

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पंचम काल में जन्म लेने वाले अच्छे नहीं माने जाते-उपाध्याय विश्रुत सागर जी : समाजजनों ने छत्रपति नगर में धर्मसभा का लाभ लिया

दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने प्रवचन में समता, संयम और धर्म के बारे में...

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