जैन मंदिर में प्रथमाचार्य शिरोमणि आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के शताब्दी वर्ष व निमाड़ गौरव राष्ट्रीय सन्त वात्सलय वारिधि आचार्य वर्धमानसगरजी महाराज के 75वें...
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दसलक्षण पर्व के उत्तम शौच धर्म के चौथे दिन आज प्रातः 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, आदिनाथ मंदिर जी नसिया जी में प्रातः माता जी के सानिध्य में वागड़ के बड़े...
परदेशीपुरा दिगंबर जैन समाज एवं वीर बाहुबली सोशल ग्रुप द्वारा परम पूज्य आचार्य विप्रणत सागर जी महाराज के आशीर्वाद से पर्युषण पर्व सुगंध दशमी पर भगवान आदिनाथ जी...
पापों का पिता कोई है तो वह लोभ है । लोभ बड़ा खतरनाक होता है। लोभ अनर्थकारी होता है। लोभ सर्व- अनर्थो का मूल कारण है। लोभ ही पाप, हिंसा, मान, मायाचारी, चोरी...
शौच का अर्थ शुचिभूत होना अर्थात् काल से आत्मा सप्तधातु मय शरीर के संसर्ग से अपवित्र कहलाता है। इस अपवित्र शरीर से भिन्न जो शुद्धात्मा का ध्यान करके उसी में रत...
उत्तम आर्जव धर्म के दिन पूज्य विनम्र सागर जी महाराज ने आचार्यश्री को याद करते हुए कहा की आज के दिन यदि हमने आचार्यश्री को गुरु माना है तो उनसे किये वादों से छल...
नगर के दिगम्बर जैन भट्टारक यशकीर्ति गुरुकुल में राजकीय अतिथि आचार्य पुलक सागर जी गुरुदेव के सानिध्य में 10 दिवसीय पाप विनाशक शिविर का आयोजन किया गया। जिसके...
ऋषभदेव नगर के दिगम्बर जैन भट्टारक यशकीर्ति गुरुकुल में राजकीय अतिथि आचार्य पुलक सागर जी गुरुदेव के सानिध्य में पर्युषण पर्व में 10 दिवसीय पाप विनाशक शिविर का...
दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिनपवित्रमति माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ नेमिनाथ व 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर मैं शांति धारा व अभिषेक...
धर्मात्मा की पहचान है क्रिया, कुछ न कुछ करता हुआ पाया जाएगा। धर्म हमें सक्रिय करता है। 24 घण्टे में तुम कोई क्रिया करो, तुम्हारी हर प्रवृत्ति में धर्म की...








