Tag - उत्तम शौच धर्म

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उत्तम शौच धर्म पर दिए प्रवचन : आप सभी के हृदय में शुचिता के भाव आए- मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज

शौच मतलब सुचिता या निर्मलता। जब क्रोध कम होता है तो भीतर कोमलता आ जाती है और हम बाहर और भीतर से सरल होने का प्रयास करने लगते हैं। लोभ तुलना पैदा करता है, डर...

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अभिषेक,शांति धारा के बाद हुए उत्तम शौच धर्म पर धर्म प्रवचन : मनाया गया पुष्पदंत नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक

राजधानी के सब से प्राचीन लगभग 150 वर्ष पुराने श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड रायपुर में दसलक्षण पर्युषण महापर्व के अवसर के चौथे दिन उत्तम शौच...

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कमला नगर जैन मंदिर में : दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन मनाया उत्तम शौच धर्म

सकल दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन बुधवार को मंदिरों में उत्तम शौच धर्म का पालन किया। मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज के...

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उत्तम शौच धर्म : इंदौर में चातुर्मास कर रहे संतों ने क्या कहां जाने उनके प्रवचन की पांच प्रमुख बातें 

इंदौर में चातुर्मास कर रहे मुनि प्रमाण सागर जी महाराज,मुनि विन्रम सागर जी महाराज, मुनि पूज्य सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से उत्तम शौच धर्म का...

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विनयांजलि सभा का आयोजन हुआ : आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण दिवस मनाया

जैन मंदिर में प्रथमाचार्य शिरोमणि आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के शताब्दी वर्ष व निमाड़ गौरव राष्ट्रीय सन्त वात्सलय वारिधि आचार्य वर्धमानसगरजी महाराज के 75वें...

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दसलक्षण महापर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म मनाया : पवित्रमति माताजी के सानिध्य में पुष्पदंत भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाया 

दसलक्षण पर्व के उत्तम शौच धर्म के चौथे दिन आज प्रातः 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, आदिनाथ मंदिर जी नसिया जी में प्रातः माता जी के सानिध्य में वागड़ के बड़े...

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धर्म सभा में दिए उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन : लोभ छोड़ो, शौचधर्म स्वीकारो – आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी 

पापों का पिता कोई है तो वह लोभ है । लोभ बड़ा खतरनाक होता है। लोभ अनर्थकारी होता है। लोभ सर्व- अनर्थो का मूल कारण है। लोभ ही पाप, हिंसा, मान, मायाचारी, चोरी...

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उत्तम शौच धर्म पर किया भगवान का अभिषेक : संतोष को धारण करने वाला पाता है परम शांति

दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम दिव्य तपस्वी राष्ट्र संत वात्सल्य सम्राट पलवल तीर्थ उपसर्ग...

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धर्म प्रभावना रथ के चौथे पड़ाव के ग्यारहवें दिन हर्षोल्लास के साथ हुई धर्म प्रभावना : जीवन में फैली मलीनता को दूर करना ही उत्तम शौच धर्म है – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज  

अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में पर्युषण पर्व के चौथे दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, संविद नगर, कनाडिया रोड पर बड़े ही हर्षोल्लास के...

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उत्तम शौच धर्म पर विशेष आलेख: आत्मा का स्वरूप ही शौच धर्म है

शौच का अर्थ शुचिभूत होना अर्थात् काल से आत्मा सप्तधातु मय शरीर के संसर्ग से अपवित्र कहलाता है। इस अपवित्र शरीर से भिन्न जो शुद्धात्मा का ध्यान करके उसी में रत...

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