Tag - आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज

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आत्महत्या का सोचना और करना पाप है इससे अल्पायु कर्म का बंध होता है: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म आराधना का महत्व समझाया 

दशलक्षण पर्व में 10 दिनों तक धर्म की आराधना धर्म की पाठशाला अध्यात्म महापर्व में आपने क्या सीखा है? उत्तम क्षमा, मार्दव आर्जव, शौचधर्म से क्रोध, मान, माया और...

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त्याग धर्म में राजा श्रेयांस ने सबसे पहले दानतीर्थ का प्रवर्तन किया : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने त्याग और दान को श्रेष्ठतम निरुपित किया 

दसलक्षण धर्म में पहले दिन से चार कषायों का त्याग करने की शिक्षाऔर उपदेश दिए गए। शास्त्रों और पूजन में उल्लेख है कि दान चार प्रकार का है और चार संघ को दीजिए। यह...

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संसार परिभ्रमण समाप्त करने के लिए बहिरंग और अंतरंग तप आवश्यक: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने करवाई इंद्र ध्वज महामंडल विधान की पूजा

आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि दशलक्षण पर्व में अनेक पर्व समाहित हैं। प्रतिदिन आप दशलक्षण धर्म और इंद्र ध्वज महामंडल विधान की पूजन कर रहे हैं। सात राजू...

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मन वचन और काय की पवित्रता से शुचिता आती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया सत्य धर्म का रहस्य 

विधानाचार्य कीर्तिय के निर्देशन में पंचामृत अभिषेक के बाद इंद्र ध्वज मंडल विधान की पूजन प्रतिदिन चल रही है। आचार्य श्री द्वारा पूजन के मध्य पूजन के द्रव्यों को...

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मन, वचन,काय कुटिलता का परित्याग सरलता धारण ही उत्तम आर्जव धर्म: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76 वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया

दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने अपनी देशना में कह कि भगवान की इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजन सामान्य बात नहीं है। बहुत...

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आचार्य श्री का 76वां अवतरण दिवस दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर भक्ति पूर्वक मनाया : मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म – आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76वां अवतरण दिवस दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रवचनों, पूजन, महाआरती...

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आध्यात्मिक साधना का अद्वितीय जीवनवृत्त : संयम, तप और वात्सल्य के प्रतीक हैं आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जीवन संयम, तप, करुणा और धर्मप्रभावना का अद्वितीय उदाहरण है। 75वें जन्मदिवस पर उनका यह जीवनवृत्त समाज के लिए प्रेरणा...

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क्षमा से ब्रह्मचर्य तक: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के प्रवचनों में जीवन की राह

– निष्कर्ष दशलक्षण महापर्व केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर है। क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, दान और ब्रह्मचर्य- ये सभी...

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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा आपकी भक्ति से हमारा चातुर्मास होना भी अतिशय : टोंक में नित्य पूजन, अभिषेक, प्रभु भक्ति, आराधना सहित साधनाओं का यहां दौर जारी 

आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज नगर में विराजित हैं। यहां उनका पावन वर्षायोग जारी है। नित्य पूजन, अभिषेक, प्रभु भक्ति, आराधना सहित साधनाओं का यहां दौर जारी...

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मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम का पालन कर धर्म धारण करना चाहिए : रत्नत्रय, धर्म समागम, वैराग्य से संवेग भावना उत्पन्न होती हैं 

15 अगस्त को देश स्वतंत्र हुआ है। इससे यह संदेश और प्रेरणा मिलती है कि हमारी आत्मा भी अनेक भवों में कर्मों के अधीन होकर विश्व, संसार में घूम रही है। उसे भी...

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