Tag - अहिंसा धर्म

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धर्म और आत्मा का असली स्पर्श तब होता है, जब मनुष्य भीतर से बदलने को तैयार होता है : चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए – आचार्य विनिश्चयसागर

रामगंजमंडी में आयोजित जैन धर्मसभा में आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी ने मनुष्य के आचरण और मूल्यों को केंद्र में रखकर संयम और सच्चाई की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने...

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धर्मसभा में आचार्य वर्धमान सागरजी - धर्म से ही संभव है आपदा से मुक्ति : इंद्रियों पर नियंत्रण और अहिंसा से ही आत्मा की रक्षा संभव

टोंक में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने आत्मा की रक्षा के लिए संयमित जीवन, इंद्रियों पर नियंत्रण और धर्म पालन का मार्ग बताया।...

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