कलिंजरा के बाहुबली परिसर में शुक्रवार दोपहर 1 बजे आचार्य विराग सागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री विकाम्या माताजी ससंघ के सान्निध्य में ब्रह्मचारिणी सुशीला दीदी ने जैनेश्वरी दीक्षा ली। समारोह में फूलों की वर्षा की और श्रीजी के जयकारों व मंगल गीत गाए। दीक्षा समारोह का स्वर्णिम क्षण देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
नौगामा। कलिंजरा के बाहुबली परिसर में शुक्रवार दोपहर 1 बजे आचार्य विराग सागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री विकाम्या माताजी ससंघ के सान्निध्य में ब्रह्मचारिणी सुशीला दीदी ने जैनेश्वरी दीक्षा ली। समारोह में फूलों की वर्षा की और श्रीजी के जयकारों व मंगल गीत गाए। दीक्षा समारोह का स्वर्णिम क्षण देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अध्यक्ष रतनपाल दोसी ने बताया कि माताजी के हर कार्य के लिए महिला मंडल पूर्ण रूप से तत्परता से लगा हुआ था। शुक्रवार सुबह 3.30 बजे दीक्षार्थी सुशीला दीदी का केशलोच हुआ। 5.30 बजे मंगल स्नान के बाद सुबह 7 बजे श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा और पूजा-अर्चना की। केशलोच प्राप्त करने का सौभाग्य भगवानलाल नाथूलाल शाह परिवार, पिच्छिका भेंट करने का सौभाग्य अरुण कुमार भगवानलाल दोसी परिवार, कमंडल भेंट करने का सौभाग्य केसरीमल कुशाल गांधी परिवार, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य अल्पेश कुमार कोठारी घाटोल, वस्त्र भेंट करने का सौभाग्य सुमित्रा शाह अरुण कुमार, जिज्ञेश, सिम्मी शाह, आहार दान करने का पात्र देने का सौभाग्य मेहता राजेश कुमार कुहासा, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य दोसी नगीनलाल किशनलाल परिवार को प्राप्त हुआ।
पाप को छोड़ना होगा
आर्यिका श्री विकाम्या माताजी ने कहा कि कलिंजरावासियों का सौभाग्य है कि पिछले 20 साल के धर्म के फल के रूप में जैनेश्वरी दीक्षा का लाभ मिला है। धर्म को अनंतकाल तक बनाए रखने के लिए धर्म की प्रभावना को बनाए रखना होगा। भगवान स्वयं भू होते हैं। पुण्य को पाने के लिए पाप को छोड़ना होगा। इस दीक्षा दिवस पर भगवान आदिनाथ के मंदिर में उन छत्र छाया में गर्मी के तेवर अपने आप परिवर्तन होकर शीतलता में बदलकर साक्षी बनकर आ गए हो। उन्होंने ने कहा कि कायरता रूपी आवरण को हटाकर शक्ति को बढ़ाना होगा। दीक्षाथी के धर्म के माता-पिता राजकुमार शाह व सुलोचना शाह व सागर मध्यप्रदेश से उनके परिवार जनों के समक्ष हुई। इस अवसर पर बागीदौरा, बड़ोदिया, नौगामा, डडूका, लोहारिया, खांदू कालोनी, बांसवाड़ा, आंजना, अरथूना, बोरी, बोड़ीगामा, तलवाड़ा, परतापुर, सागर मध्यप्रदेश, कुशलगढ, भीमपुर से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
दीक्षार्थी का जीवन परिचय
सुशीला जैन
जन्म: 1946 में हटा दमोह म.प्र.
पिता: बाबूलाल जैन
माता: काशी बाई जैन
भाई: देवेंद्र
बहन: मुन्नी बाई
पुत्र: संजय, संदीप, सुरेंद्र, जिनेंद्र
पुत्री: सीमा, सरिता जैन













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