धर्म नगरी मुरैना में ही 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर माता श्रीमती अशर्फी देवी जैन की कोख से बालक उमेश का जन्म हुआ। पूज्य गुरुदेव भगवान महावीर निर्वाण दिवस 15 नवम्बर 2020 को अतिशय क्षेत्र बारां (कोटा) में समाधि को प्राप्तकर मोक्षगामी हो गए। गुरुदेव के अवतरण दिवस पर पढ़िए मनोज जैन नायक का विशेष आलेख…
मुरैना। चम्बल की धरा यूं तो खूंखार डकैतों की बजह से काफी बदनाम रही है लेकिन समय सब कुछ बदल देता है। मध्यप्रदेश के चम्बल अंचल में ऐतिहासिक सम्पदा का भंडार है। ककनमठ शिव मंदिर, बटेश्वर, मितावली, जैन मंदिर सिहोनियां, जैन मंदिर टिकटोली, करह वाले बाबा का मंदिर, घरोना हनुमान मंदिर, विश्व प्रसिद्ध शनि मंदिर जैसे अनेकों पुरात्तव की धरोहर के साथ अनेकों सुप्रसिद्ध तीर्थ एवं मन्दिर इस चम्बल की धरती पर विद्यमान हैं।
षष्ट पट्टाचार्य पद से हुए सुशोभित
चम्बल के आंचल में नगर मुरैना समाया हुआ है। इसी पावन सरजमीं पर धर्म नगरी मुरैना में ही 01 मई 1957 को श्री शांतिलाल जैन (विचपुरी वाले) के घर माता श्रीमती अशर्फी देवी जैन की कोख से बालक उमेश का जन्म हुआ। बालक उमेश बचपन से ही आध्यात्म में रुचि रखते थे। उन्हें यह सांसारिक सुख घर में बांधकर नहीं रख पाया। बालक उमेश ने मात्र 17 साल की अल्पायु में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संयम के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया और परम पूज्य मसोपवासी आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज से 05 नबम्बर 1976 में क्षुल्लक दीक्षा एवं 31 मार्च 1988 को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मुनि दीक्षा ग्रहण की और मुनिश्री ज्ञानसागर महाराज नामकरण हुआ। 30 जनवरी 1989 को सरधना (मेरठ) में आपको उपाध्याय एवं 27 मई 2013 को अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) में आचार्य एवं छाणी परम्परा के षष्ट पट्टाचार्य पद से सुशोभित किया गया। पूज्य गुरुदेव भगवान महावीर निर्वाण दिवस 15 नवम्बर 2020 को अतिशय क्षेत्र बारां (कोटा) में समाधि को प्राप्तकर मोक्षगामी हो गए।
जैन मंदिर का कराया निर्माण
संस्कारधानी, धर्म नगरी मुरैना की पावन धरा पर अवतरित हुए परम पूज्य सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से ए. बी. रोड (धौलपुर-आगरा) हाइवे पर एक विशाल एवं भव्य जैन तीर्थ (जैन मंदिर) का निर्माण कराया गया है। सूत्र बताते हैं कि लगभग 15 बर्ष पूर्व इस जैन तीर्थ की कल्पना पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने की थी। उनकी कल्पना को साकार करने के लिए उनके भक्तों ने जमीन खरीदी। इस जैन मंदिर का निर्माणकार्य लगभग 12 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ था, जो आज पूर्णता की ओर है।
भगवान आदिनाथ की विशाल मूर्ति
लगभग 14 बीघा के विशाल प्रांगड़ में 55 फुट के कैलाश पर्वत की संरचना की गई है । इस पर्वत के ऊपर 7 फुट की वेदिका पर 3 फुट ऊंचे कमल सिंहासन पर साढे तेरह फुट ऊंची जैन धर्म के प्रवर्तक, प्रथम तीर्थंकर श्री 1008 भगवान आदिनाथ की पद्माशन प्रतिमा 14 जुलाई 2016 में विराजमान की गई है। प्रतिमा के पीछे सुंदर आकर्षक कल्पवृक्ष बनाया गया है। भगवान आदिनाथ की विशाल, भव्य एवं आकर्षक मूर्ति दिल्ली निवासी श्री बकीलचन्द जैन ने प्रदान की है।पर्वत के नीचे प्रथम तल पर जिनालय में भगवान आदिनाथ, भगवान मुनिसुव्रतनाथ, भगवान चन्द्रप्रभु, भगवान शांतिनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीरस्वामी की प्रतिमाएं विराजमान रहेंगी।
भोजनशाला और आवसीय भवन का निर्माण
प्रारम्भिक दौर में ज्ञानतीर्थ के निर्माण में स्व.श्री प्रेमचन्द जैन (तेल वाले) मेरठ, पंकज जैन मेरठ, रवि जैन गाजियाबाद, प्रमोद जैन बलबीर नगर, राकेश जैन दिल्ली के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञानसागर जी की समाधि के पश्चात निर्माण कार्य की गति को विराम सा लग गया था। तब गुरुभक्त सर्वश्री योगेश जैन (खतौली वाले) सूर्यनगर दिल्ली, आनन्द जी (खेकड़ा वाले), सतीश जी (प्रीति होजरी), राकेश जी आजाद नगर, आशीष जैन विकास नगर, जिनेन्द्र जैन (जेडी), राजेश जैन (हलुआ वाले), महेशचंद ठेकेदार, ब्रह्मचारिणी बहिन अनिता दीदी, मंजुला दीदी, ललिता दीदी एवं अन्य सभी गुरुभक्तों ने ज्ञानतीर्थ पर गुरुचरण स्थापित कर निर्माणकार्यों को गति प्रदान की। ज्ञानतीर्थ पर आगन्तुक महानुभावों के आवास के लिए एक विशाल एवं भव्य तीन मंजिला अथिति गृह का निर्माण किया गया है। उक्त आवासीय भवन को ज्ञान गेह नाम दिया गया है। जिसमें सर्व सुविधायुक्त 37 कमरे बनाये गए हैं। मुनिराजों, साधु-साध्वियों की आहारचर्या एवं त्यागी व्रतियों के भोजनादि हेतु विशाल एवं भव्य आहार शाला बनाई गई है, जिसे ज्ञान अहारं नाम दिया हुआ है। क्षेत्र पर प्रतिदिन दर्शनार्थ आने वाले बन्धुओं के लिए 5000 वर्गफुट में एक विशाल एवं भव्य भोजनशाला बनाई गई है, जिसमें 200 व्यक्ति एक साथ बैठकर भोजन कर सकते हैं। उक्त भोजनशाला को ज्ञान पोषणम नाम से जाना जाएगा।
भव्य बगीचे का होगा निर्माण
अभी ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर काफी निर्माण कार्य होना शेष हैं। जिसमें जिन मन्दिर, साधु-संतों के धर्मध्यान एवं विश्राम हेतु सन्त निवास, ज्ञानसागर गुरु मन्दिर एवं कीर्ति स्तम्भ एवं गौशाला का निर्माण प्रमुख रूप से होंगे। खाली जमीन पर भव्य बगीचे का निर्माण होगा, जिसमें सभी तरह के पुष्प एवं पौधे लगाए जाएंगे।
गुरुभक्ति का दिया परिचय
पूज्य गुरुदेव सराकोद्धारक छाणी परम्परा के षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के मुख्य निर्देशन में ज्ञानतीर्थ जैन मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा हेतु 01 फरवरी से 06 फरवरी 2023 तक श्री जिनविम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तिकाभिषेक महोत्सव का विशाल एवं भव्य आयोजन सानन्द हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में पट्टाचार्य श्री विनीतसागर जी महाराज, गणिनी आर्यिका सर्वश्री लक्ष्मीभूषण जी, सृष्टीभूषण जी, आर्षमति माताजी ससंघ सहित लगभग 50 साधु-संत सम्मिलित हुए थे। इस महोत्सव में देशभर से 50,000 से अधिक साधर्मी बन्धुओं ने सम्मिलित होकर गुरुभक्ति का परिचय दिया। पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से ही आगरा हाइवे पर श्री ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर का निर्माण हुआ है ।













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