आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश गुरुवार को प्रातः काल सिंगोली नगर में हुआ। नगर प्रवेश पर आयोजित धर्मसभा में मंगल देशना हुई। 108 थाली में आचार्य श्री का समाजजनों ने पाद प्रक्षालन किया। सिंगोली से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
सिंगोली। मंदिर में जो परंपरा विद्यमान है। उसे बनाकर रखना चाहिए। पुरानी आगम परंपरा को हटाकर नई व्यवस्था करना आगम के अनुरूप नहीं है। इससे समाज खंडित होता है। वर्तमान में समाज को संगठित होना जरूरी है, समाज के संगठन से धर्म की प्रभावना होती है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सिंगोली नगर प्रवेश पर आयोजित धर्मसभा में प्रगट की । उन्होंने कहा कि मंदिर का विकास सभी के सामूहिक प्रयासों से होता है। भगवान के जिनालय में पूजन भक्ति कर मनुष्य जीवन को सफल बनाना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि मंदिर में जो अभिषेक एवं पूर्व से विराजित शासन देवी देवताओं को हटाना गलत है जो व्यवस्था पूर्व से चल रही उसे बदलना आगम अनुसार नहीं है उनका अनादर नहीं होना चाहिए। आचार्य श्री ने उपदेश में आगे बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने कर्नाटक महाराष्ट्र से उत्तर भारत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर जी के लिए विहार किया तब भी नर-नारी के अभिषेक पूजन के लिए चैत्यालय साथ में रहता था तब से वर्तमान तक यह परम्परा चल रही हैं।
जिनवाणी को ताम्र पत्रों पर अंकित कराया
आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज ने दिगंबर जिनालयों के संरक्षण के लिए 1105 दिन से अधिक का अन्न आहार त्याग किया।जिनवाणी को भी ताम्र पत्रों पर अंकित कराया। वर्तमान में जिनालयों का दर्शन पूजन उन्हीं के कारण स्वतंत्रता पूर्वक सुलभ है। इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश गुरुवार को प्रातः काल नगर में हुआ। समाज के अध्यक्ष चांदमल बगड़ा, मंत्री निर्मल खटोड़ एवं पारस ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से ससंघ 36 मुनिराजों का नगर में विशाल संघ के साथ वर्ष 1998 के बाद दूसरी बार मंगल पदार्पण हुआ है।
108 थाली में आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया
नगर प्रवेश के दौरान समाजजनों ने जगह-जगह आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। वहीं 108 थाली में आचार्य श्री का समाजजनों ने पाद प्रक्षालन किया, जो यादगार क्षण था। आचार्य श्री संघ का मंगल प्रवेश जुलूस नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पहुंचा जहा पर श्रीजी के दर्शन किए। उसके बाद विद्यासागर संत निलय पहुंचे जहां पर धर्मसभा हुई।
नगर आगमन के लिए निवेदन
सर्वप्रथम मंगलाचरण बालिका मण्डल द्वारा, आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज के चित्र अनावरण समाज कार्यकारणी समिति सिंगोली व किशनगढ़ से पधारे समाजजनों द्वारा, दीप प्रज्वलन बिजोलिया समाजजनों ने, आचार्य का प्राद प्रक्षालन अनिल कुमार सामरिया परिवार झांतला और शास्त्र भेंट कैलाशचन्द, सौरभ कुमार बगड़ा द्वारा किया गया। इस अवसर पर बोराव, धनगांव, थडोद, किशनगढ़ झांतला, बिजोलिया, कोलकाता, विजयनगर, रावतभाटा बेगु आदि नगरों के समाजजनों ने उपस्थित होकर नगर आगमन के लिए निवेदन किया।













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