समाचार

सोलह कारण, दशलक्षण आदि आत्मा की विशुद्धता के पर्व: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म देशना में बताया पर्वों का महत्व 


चातुर्मास वर्षायोग में अनेक पर्व आते हैं। शनिवार को वात्सल्य पूर्णिमा रक्षाबंधन का पर्व आपने मनाया। अभी 16 कारण पर्व चल रहा है। इसके पश्चात पर 10 लक्षण पर्यूषण पर्व भी आएगा। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने धर्मसभा में प्रकट की। टोंक से पढ़िए, यह खबर….


टोंक। चातुर्मास वर्षायोग में अनेक पर्व आते हैं। शनिवार को वात्सल्य पूर्णिमा रक्षाबंधन का पर्व आपने मनाया। अभी 16 कारण पर्व चल रहा है। इसके पश्चात पर 10 लक्षण पर्यूषण पर्व भी आएगा। धार्मिक पर्वों से आत्मा के कर्मों कषाय की मलिनता दूर होती है। अभी मुनि श्री ने सम्यक दर्शन के गुणों और दोषों मद कषाय की विवेचना की। 16 कारण भावना में दर्शन विशुद्धि पहली भावना है। जिस प्रकार शारीरिक दृष्टि, नजर दोष चिकित्सक दूर करता हैं उसी प्रकार आत्मा में कर्म रूपी रोग सम्यकदर्शन, आस्था, विश्वास से दूर होकर निर्मलता आती हैं। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने धर्मसभा में प्रकट की।

राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि जिन बिम्ब प्रतिमा दर्शन भी सम्यकदर्शन प्राप्ति का कारण है और सम्यक दर्शन ही मोक्ष मार्ग की राह है। धार्मिक पर्वों में आप व्रत नियम धारण करते हैं। तत्वार्थ सूत्र की छठी गाथा में उल्लेख है कि 16 कारण भावनाओं से तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध होता है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने भी 9938 उपवासों में 16 वर्षों तक प्रतिवर्ष 16 उपवास किए थे। उपवास से कर्मों की निर्जरा होती है। सम्यक दर्शन रूपी चाबी से मोक्ष मार्ग रूपी ताला आप खोल सकते हैं।

आचार्य श्री सम्यक दर्शन के 25 दोषों में 8 मद, 6 अनायतन आदि दोषों की विवेचना की। भगवान की वाणी पीने सुनने से आत्मा की अशुद्धि दूर होती है। इच्छाआंे का परिवर्तन जरूरी है क्योंकि, मिथ्यात्व, परिग्रह का संचय आपने अनादि काल से किया है। आचार्य श्री के उपदेश के पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी ने उपदेश में रत्नत्रय के तीन अंग सम्यक दर्शन, ज्ञान चरित्र की विवेचना में सम्यक दर्शन के 8 मद कषाय से हानि बताई। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के निर्देशन में मुनि श्री चिन्मय सागर जी की नियम साधना चल रही हैं। मुनि श्री चिन्मय सागर जी एक दिन छोड़कर आहार में मात्र जल और दूध ही ले रहे हैं। आचार्य श्री मुनि श्री को नियमित संबोधन दे रहे हैं।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
1
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page