अष्टान्हिका महापर्व पर सिद्धचक्र विधान महामंडल के तहत 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में चल रहे 8 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन विधान के मंडल पर कुल 1024 अर्घ्य चढ़ाए गए। ट्रस्ट कार्यकारिणी कमेटी के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन ने बताया कि आज पांडुक शीला में विराजमान भगवान का सर्वप्रथम स्वर्ण कलशों से अभिषेक किया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
रायपुर। अष्टान्हिका महापर्व पर सिद्धचक्र विधान महामंडल के तहत 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में चल रहे 8 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन विधान के मंडल पर कुल 1024 अर्घ्य चढ़ाए गए। ट्रस्ट कार्यकारिणी कमेटी के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन ने बताया कि आज पांडुक शीला में विराजमान भगवान का सर्वप्रथम स्वर्ण कलशों से अभिषेक किया गया।
साथ ही रिद्धि -सिद्धि सुख शांति प्रदाता शांति धारा करने का सौभाग्य कैलाशचंद, संदीप कुमार जैन, सुरेश चंद जैन कबीर नगर ,नरेंद्र कुमार निलेश कुमार जैन, सौरभ जैन टैगोर नगर वालों को प्राप्त हुआ। शांति धारा पश्चात पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने बड़े भक्ति भाव से नृत्य करते श्री जी की संगीतमय आरती की। विधानचार्य ब्रह्मचारी विजय भैया (गुणायतन) के सानिध्य में सिद्धचक्र महामंडल के सातवें दिन देव शास्त्र गुरु एवं नंदीश्वर दीप पूजन की गई। आयोजित विधान में मंत्रोच्चारण से पूरा पंडाल गूंज उठा। इस अवसर पर गुणायतन से पधारे विधानाचार्या विजय भैया ने बताया कि कल सम्पूर्ण विश्व में सद्भावना आपसी प्रेम एवं शांति बने रहे, इस उद्देश्य से विश्वशांति महायज्ञ के साथ सिद्धचक्र विधान का समापन होगा। जिसमें विधान में भाग लेने वाले हवन कुंड में आहुति डाल विश्व में शांति सद्भावना की मंगलमय कामना कर आहुति डालेंगे। उन्होंने बताया कि सिद्ध चक्र एवं अष्टान्हिका का क्या महत्व है।
उन्होंने कहा कि दस भावों का महापर्व यानी ‘दस लक्षण महापर्व’ एक ऐसा ही शाश्वत पर्व है। यह आत्मा की सर्वश्रेष्ठ सहनशीलता, विनम्रता, सरलता आदि से संबंधित है; जो क्रोध, अहंकार आदि अशुद्ध भावों की समाप्ति के लिए होता है। ऐसा ही एक और त्योहार ‘अष्टान्हिका पर्व’ है, जिसमें तीन बार आठ दिन के लिए नंदीश्वर द्वीप में जिनेंद्र भगवान की अकृत्रिम मूर्तियों की पूजा की जाती है। अष्टान्हिका पर्व में सिद्धों की विशेष भक्ति होती है क्योंकि उन्होंने आठों कर्मों का नाश किया। उनके हजारों गुणों को स्मरण करने के लिए सिद्ध चक्र महामंडल विधान किया जाता है। हजारों साल पहले मैना सुंदरी नामक महिला ने पहली बार सिद्ध चक्र महामंडल विधान किया था और इसे करने से उसके पति के साथ-साथ सारे गांव का कुष्ठरोग ठीक हो गया था। इसलिए सदैव पवित्र एवं पूरी श्रद्धा के साथ अनुष्ठान या विधान का फल लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है।
आज इस विधान में श्री महावीर जन्म कल्याणक 2024 के अध्यक्ष जितेंद्र गोलछा कोषाध्यक्ष अमित मूणत एवं महासचिव वीरेंद्र डागा एवं पारस चैनल के डायरेक्टर प्रकाश मोदी दैनिक विश्व परिवार के डायरेक्टर प्रदीप जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। ट्रस्ट कमेटी एवं विधानाचार्य द्वारा सभी उपस्थित अथितियों का तिलक लगा कर सम्मान भी किया।













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