समाचार

शास्त्र अवतरण का पर्व श्रुत पंचमी हर्षोल्लास से मनाया : निकाली गई जिनवाणी की शोभायात्रा


श्रुत पंचमी के अवसर पर दिगंबर जैन समाज साउथ तुकोगंज, कंचन बाग द्वारा इस अवसर पर शास्त्रों की पूजा-अर्चना की गई एवं उन्हें पालकी में रखकर शोभा यात्रा निकाली गई। सुबह सभी श्रद्धालुओं द्वारा समस्त शास्त्रों और जिनवाणी की साफ-सफाई कर उन्हें उचित स्थान पर विराजमान किया गया। पढ़िए संजीव जैन संजीवनी की रिपोर्ट…


इंदौर। शास्त्र अवतरण दिवस श्रुत पंचमी जैन दर्शन में सरस्वती अर्थात् जिनवाणी सेवा के दिवस के रूप में मनाया जाता है। दिगंबर जैन समाज साउथ तुकोगंज, कंचन बाग द्वारा इस अवसर पर शास्त्रों की पूजा-अर्चना की गई एवं उन्हें पालकी में रखकर शोभा यात्रा निकाली गई। सुबह सभी श्रद्धालुओं द्वारा समस्त शास्त्रों और जिनवाणी की साफ-सफाई कर उन्हें उचित स्थान पर विराजमान किया गया एवं प्राचीन ग्रंथों को एक पालकी में रखकर प्रातः 7:30 बजे एक जुलूस के रूप में समवशरण मंदिर से कल्याण भवन मंदिर ले जाया गया। वहां से प्राचीन ग्रंथों को समवशरण मंदिर में दर्शनार्थ लाया गया।

दिए गए पुरस्कार

समाज की अध्यक्षा रानी दोशी ने बताया कि इस अवसर पर श्रुत स्कन्ध विधान का भी आयोजन किया गया। समाज के संजीव जैन संजीवनी ने बताया कि तुकोगंज जैन समाज महिला मंडल के द्वारा इस पर्व पर एक प्रश्नोत्तरी रखी गई थी। उर्मिला जैन, मीना बाकलीवाल, महेंद्र जैन, अमित जैन, गोलू जैन, गौरव जैन व अन्य गणमान्य स्त्री-पुरुष इस अवसर पर उपस्थित थे। सुमन जैन के माध्यम से सभी को आकर्षक पुरस्कार दिए गए।

बताया महत्व

कार्यक्रम के अंत में बाल ब्रह्मचारी रतन चंद्र शास्त्री ने श्रुत पंचमी महापर्व के महत्व को बताते हुए कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल की पंचमी तिथि जैन परंपरा में सदियों से मनाई जा रही है। इस दिन शास्त्र भण्डारों में रखे प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश आदि प्राचीन भाषाओं में हस्तलिखित प्राचीन मूल शास्त्रों को शास्त्र भण्डार से बाहर निकाल कर भगवान की वेदी के समीप विराजमान करके उनकी पूजा की जाती है। सुरक्षा की दृष्टि से शास्त्रों को बांधने वाले वस्त्र आदि को बदलकर उन्हें नए वस्त्रों में सुरक्षित किया जाता है। इसके साथ ही अप्रकाशित दुर्लभ ग्रंथ प्रकाशित करने की योजनाएं बनाई जाती हैं। गृहस्थ लोग शास्त्रों की सुरक्षा के लिए शास्त्रों के प्रकाशन के लिए यथा शक्ति दान करते हैं। श्रुतपंचमी जैनधर्म में शास्त्र अवतरण का पर्व कहा जाता है। महावीर जयंती की तरह से ही इस ज्ञान पर्व को बड़े उत्साह व श्रद्धा- आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन शास्त्रों की विशेष पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं। यह पर्व ज्ञान आराधना का मांगलिक महापर्व है।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page