आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ का वर्ष 2025 का वर्षायोग नगर में ही कराने की विनती करते हुए पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में सेठ करणमल की अगुवाई में श्री समाज ने श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंट किया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने प्रबोधन दिया। 24 पूर्व आचार्यश्री का वर्षायोग हुआ था। धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की पढ़िए यह खबर…
धरियावद। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ का वर्ष 2025 का वर्षायोग नगर में ही कराने की विनती करते हुए पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन में सेठ करणमल की अगुवाई में श्री समाज ने भक्ति भाव सहित श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंट किया। इस अवसर पर आचार्य श्री ने आश्वस्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार साइकिल चलाने के लिए चेन की कड़ी एक-दूसरे से जुड़कर चलती रहती है। तब तक साइकिल चलती रहती है। जब कड़ी छूट कर चेन उतर जाती है, फिर साइकिल आगे नहीं बढ़ती है। इसी प्रकार अगर समाज की संघ से कड़ी निरंतर जुड़ी रहती है तो वर्षायोग भी समाज के लिए कोई असंभव बात नहीं है।
जयकारों से गूंजा सभा स्थल
श्रीफल साथी अशोककुमार जेतावत ने बताया कि इस अवसर पर चंद्रप्रभ मंदिर सभास्थल शुक्रवार को श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। भक्तों ने आचार्य श्री के विनती भरे नारों की जयकारों के साथ सभा स्थल को गुंजायमान कर दिया। आचार्य श्री का 24 वर्षों पूर्व श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर (धरियावद) और श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर हेमवत जिनालय नंदनवन की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के बाद आर्यिका विशुद्ध मति माताजी की समाधि तक 13 माह का प्रवास मिला था। अब 24 वर्षों के बाद भक्तों की आस वर्षायोग 2025 की विनती से फिर जाग उठी है।













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