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मुनिश्री की दिव्यदेशना से लाभान्वित हो रहे श्रद्धालु : आदिनाथ को आहार दान देकर हर्षित हुए श्रावकजन


पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान में बुधवार को प्रातःकाल जिन अभिषेक पूजन, तपकल्याणक पूजन हुआ। भगवान आदिनाथ के मुनि अवस्था महामुनि बृषभनाथ की आहारचर्या राजा श्रेयांस राजीव सिंघई कुम्हैडी और राजा सोम अभिनंदन बाजा के यहां हुई। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…


महरौनी(ललितपुर)। मुनिश्री सुधासागर महाराज द्वारा सृजित अतिशयकारी तीर्थ यशोदय पर धर्मप्रभावना बढ़ रही है। भव्य पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान में बुधवार को प्रातःकाल जिन अभिषेक पूजन, तपकल्याणक पूजन हुआ। भगवान आदिनाथ के मुनि अवस्था महामुनि बृषभनाथ की आहारचर्या राजा श्रेयांस राजीव सिंघई कुम्हैडी और राजा सोम अभिनंदन बाजा के यहां हुई।

जैन दर्शन उठाता है ऊपर

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा कि जैनदर्शन तो व्यक्ति को जितना ऊपर उठाता हैं, वहां से व्यक्ति कभी नीचे नही आता और रास्ते खत्म हो सकते लेकिन वहां से वह अधोगति को नहीं जाता। आज हर कोई दुनिया को अपने विचारों से चलाना चाहता है, सब अपने परिवार के लोगो को अपने तरीके से चाहता है परंतु ऐसा विचार दुर्गति और विनाश कारण है। हिटलर ने अपने विचारों को थोप विनाश कर दिया। साधु के स्वरूप को जिस दिन श्रावक समझ जाएगा, वह उस दिन गुरु के आशीर्वाद में अहिंसा के छुपे रहस्य को समझ जायेगा। जब भी कोई तुम्हारे घर कोई मांगने वाला आये और तुम्हारे मन में न देने के भाव आये समझ लेना ये तुम्हारे बुरे दिन आने के कारण आ गये। अगर मांगने वाले के आने पर तुम्हारे मन आहोभाग्य का भाव आ गया तो समझ लेना ये तुम्हारे अच्छे दिनों की शुरुआत हो गयी। जैन मुनि कभी भी अपने नियमों में कोई भी परिवर्तन नहीं करते और जो नियम होते उनका पूरी निष्ठा से पालन कर अपनी चर्या करते है। क्योंकि जब श्री वृषभ सागर मुनि के जब आहार होने थे, तब वह आहार चर्या के लिए अपने नियम से रहे क्या वो विचारों से क्या वो अपने अनुसार परिवर्तन नहीं कर सकते थे क्योंकि उनको पता था कि जैन दर्शन नियमों का दर्शन है। यहां नियम में कोई परिवर्तन नहीं और यही पथ मोक्षपथ है, यही उर्ध्व दिशा है।

हुई ज्ञान कल्याणक की क्रियाएं

दोपहर में ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के दिशा-निर्देश में ज्ञान कल्याणक की क्रियाएं की गईं। जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर द्वारा सूरिमंत्र दिया गया।केवलज्ञानोत्पति, समोशरण की रचना, मुनिश्री द्वारा दिव्यदेशना एवं ज्ञान कल्याणक पूजन किया गया। शाम को मुनिश्री सुधासागर द्वारा जिज्ञासा समाधान किया गया और संगीतमयी आरती हुई। मुनिश्री सुधासागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य राजा सोम परिवार खेमचंद अभिनंदन बाजा को प्राप्त हुआ तथा क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य महेन्द्र खिरयावाले को प्राप्त हुआ।

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