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संस्कृति, सभ्यता और संस्कार हमारी धरोहरः मुनि सुधासागर जी

मुनि श्री ने कहा, बहुत ज्यादा पुण्य का उदय भी पतन की वजह

ललितपुर. राजीव सिंघई। श्री अभिनन्दनोदय तीर्थ में श्रमण मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने धर्मालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि बहुत ज्यादा पुण्य के उदय आने से हमारा पतन हो जाता है और बहुत ज्यादा पाप कर्म के उदय से कुचित कदाचित उत्थान हो जाता है। बहुत ज्यादा पुण्य भी पतन का कारण है क्योंकि बहुत ज्यादा खुशी भी हमें बेखबर कर देती है, हमें अपने आप से दूर कर देती है। शराब का मद तो कुछ देर बाद उतर जाता है, पर पैसा का नशा हमें दिशाहीन कर देता है। पैसा बुरा नहीं, पैसे का नशा बुरा है, यही उसके पतन का कारण है।

मुनि श्री ने कहा कि सुख हमें बाहर की दुनिया में ले जाता है और दुःख हमें अपने आप से मुलाकात करा देता है क्योंकि दुख में हम अकेले होते हैं और यहीं से हमारा उत्थान प्रारम्भ होता है। उन्होंने बच्चों को सीख देते हुए कहा कि जिस कार्य को करने पर हमें यह डर लगे कि कहीं मां- बाप को पता न चल जाए, उस कार्य को कभी मत करना क्योंकि बुरे कार्य ही मां- बाप से छिपकर किए जाते हैं और बुरे का अंजाम हमेशा बुरा होता है। उन्होंने कहा कि तुम वह कार्य करना जिसके करने पर मां- बाप गर्व महसूस करें, प्रसन्नता का अनुभव करें। पूरे विश्व में अपने देश की अलग पहचान है। भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कार ही हमारी धरोहर हैं। हमें इनकी हर हाल में रक्षा करनी चाहिए। हमारे पूर्वजों ने हमें जो संस्कृृति और संस्कारों की मशाल सौंपी है, हमें इसे हर हाल में जलाए रखना है।

इसके पूर्व प्रातःकाल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया। इसके उपरान्त मुनि श्री के मुखारविन्द से शान्तिधारा हुई। तदुपरान्त श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। सोमवार को निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज को आहारदान पूर्व प्रबंधक कीर्तिशेष दयाचंद सुनीलकुमार जरावली परिवार एवं मुनि पूज्यसागर महाराज को आहारदान आनंद कुमार कुलदीप अनमोल टेडर्स परिवार को, ऐलक धैर्य सागर को आहारदान अशोक जैन देवरान परिवार एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर को आहारदान रमेश चंद जैन लागौन परिवार को मिला।

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