आचार्य विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्री श्रुतसागरजी अब नांद्रे में विराजित है। इस अवसर पर मुनिश्री सारस्वत सागर जी ने प्रवचन में कहा कि सम्यक् दर्शन ज्ञान चारित्राणि मोक्षमार्ग। यह जैन दर्शन का प्रसिद्ध सूत्र है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे। आचार्य विशुद्धसागरजी के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी, मुनिश्री जयंत सागर जी, मुनिश्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्री श्रुतसागरजी अब नांद्रे में विराजित है। इस अवसर पर मुनिश्री सारस्वत सागर जी ने प्रवचन में कहा कि सम्यक् दर्शन ज्ञान चारित्राणि मोक्षमार्ग। यह जैन दर्शन का प्रसिद्ध सूत्र है। सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र की संयुति ही मोक्ष का मार्ग है। सम्यक् शब्द समीचीनता का द्योतक है। यह तीनों में अनुगत है। यहां दर्शन का अर्थ श्रद्धा है, तत्त्वों के यथार्थ स्वरूप की श्रद्धा को सम्यक् दर्शन कहते हैं। वास्तविक बोध सम्यक् ज्ञान है तथा आत्म-कल्याण के लिए किया जाने वाला सदाचरण सम्यक् चारित्र है।
सम्यक् श्रद्धा, ज्ञान और आचरण तीनों के योग से ही मोक्ष मार्ग बनता है। लोक में रत्नों की तरह दुर्लभ होने के कारण इन्हें रत्नत्रय भी कहते हैं। ये तीनों मिलकर ही मोक्षमार्ग कहलाते हैं। प्रवचन के दौरान महावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष जिनेश्वर पाटील, सेक्रेटरी सुधीर चौधरी, अनिल पाचोरे, एनजे पाटील, सुधीर भोरे, मनोज पाटील, शुभम पाचोरे, सुहास पाचोरे, सुदर्शन पाटील,सतीश पाटील (पोपट पाटील), सोनू उपाध्ये, दादासाहेब पाटील (इंगळे), नवीनकुमार पाटील, वैभव चौधरी, सूरज पाचोरे, निखिल पाटील, विनय पाचोरे, भरत पाटील (पांढरे ), अमोल पाटील (लि.), सुहास पाटील (लि.), भरत पाटील (गाका), अभय सकळे, गुलाब मुजावर, भगवान महावीर जैन मंदिर कमेटी व पूजा महा महोत्सव कमेटी, वीर सेवा दल नांद्रे, वीर महिला मंडळ, पार्श्व महिला परिषद, जैन युवा मंच के युवा पदाधिकारी, प्रभावणा समिति के कार्यकर्ता उपस्थित थे।













Add Comment