समाधिस्थ आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की पुण्य स्मृति दिवस पर फल वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया। यह आयोजन श्री सृष्टि भूषण माताजी के सानिध्य में हुआ। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
अम्बाह। समाधिस्थ आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की पुण्य स्मृति दिवस पर फल वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया। छाणी परम्परा के पंचम पट्टाचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संघ सानिध्य में पूज्य गुरुदेव की समाधि पर प्रातः परेड जैन मंदिर में दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण अशोका देवी जैन ने किया। उसके बाद आर्यिका श्री 105 सृष्टि भूषण माताजी ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आचार्य श्री सन्मति सागर महाराज एक सिध्दांतवादी सन्त थे।
उन्होंने अनेकों शहरों में मंदिरों के निर्माण की प्रेरणा दी और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कराये। पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज का अम्बाह के पास बरबाई गांव में जन्म हुआ था। आचार्य श्री सन्मति सागर महाराज ने 14 मार्च 2013 को शकरपुर दिल्ली में समाधिपूर्वक मरण कर इस नश्वर देह का त्याग किया था। पूज्य आचार्य श्री का जितना विशाल एवं अगाध व्यक्तित्व था, उनका कृतित्व उससे भी अधिक विशाल था। आपने अतिशय बड़ागांव में त्रिलोकतीर्थ धाम की रचना कर एक अद्भुत कृति प्रदान की है। विश्व में प्रथमवार सिंहरथ का संचालन कर आपने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था।
आचार्य श्री के कर कमलों द्वारा अनेक भव्य जीवों ने जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार कर अपना जीवन धन्य किया। इस पुण्य स्मृति दिवस पर परेड जैन मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया। सभी को फल वितरित किये गए। रात्रि 7 बजे आरती एवं भजन संध्या एवं आधे घंटे का णमोकार मंत्र का सामूहिक पाठ भी किया गया, जिसमें महिलाएं, पुरुष, बच्चे सभी सम्मिलित हुए ।













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