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क्रोध करने से बुद्धि का विकास रुक जाता है : मुनिश्री जयंत सागर जी की मंगल देशना से ओतप्रोत हो रहे धर्मानुरागी 


आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागरजी महाराज यहां के 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर विराजमान हैं। मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी ने मंगलवार को अपने प्रवचन में कहा कि क्रोध आने पर क्या करे? नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


नांद्रे। आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागरजी महाराज यहां के 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर विराजमान हैं। मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी ने मंगलवार को अपने प्रवचन में कहा कि क्रोध आने पर क्या करे? मित्र! इस संसार में अधिक से अधिक संबंध मित्रता आदि जितने भी विकल्प आते हैं तो मात्र हमारे क्रोध, मान के कारण। आज हमें वही बताना है कि जब भी आपको क्रोध आए, झगडा करने का मन हो तो सबसे पहले अपने पेट को भरना और सामने वाले के पेट को भी भरना क्योंकि, खाली पेट होने से हमारे पेट की जठराग्नि भड़कने लगती है। इसलिए खाली पेट हो तो जिससे झगडा हो रहा हो तो सबसे पहले खुद मीठा खाओ और साथ ही सामने वाले का पेट भरकर आओ।

जब झगडा नहीं करेंगे तो उससे दो काम होंगे। पहला कि झगडा टल जाएगा और दूसरा क्रोध अपना और सामने वाले का चला जाएगा। जिससे हमारे हिंसा करने के परिणाम भी नही होंगे और अहिंसा का पालन भी हो जाएगा। क्रोध करने से हमारे बुद्धि का विकास रुक जाता है। कार्य करने में मन नही लगता। बात करने में अपशब्द का उपयोग होता है। इसलिए क्रोध नहीं करना चाहिए और क्रोध आता है तो क्रोध को रोकना सीखो। उसी में हमारा भी भला है और दूसरों का भी भला है।

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