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श्री सम्मेद शिखरजी में ‘ले छलांग!’ पुस्तक का विमोचन : झिझक से क्रियान्वयन तक-निडर उद्यमिता के लिए आपका रोडमैप


जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी, मधुबन में ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन हुआ। श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेदशिखर ट्रस्ट, मधुबन के तत्वावधान में डॉ. पंकज जैन की पुस्तक ’“ले छलांग! ‘फ्रॉम हेजिटेशन टू एक्ज्यूक्यूशन-योर रोडमेप टू फियरलेस इंटरपिनर्शिप’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों और शहरों से आए समाजजन और विद्धान मौजूद रहे। मधुबन से पढ़िए, यह खबर… 


मधुबन (झारखंड) /कोडरमा। जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी, मधुबन में ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन हुआ। श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेदशिखर ट्रस्ट, मधुबन के तत्वावधान में डॉ. पंकज जैन की पुस्तक ’“ले छलांग! ‘फ्रॉम हेजिटेशन टू एक्ज्यूक्यूशन- योर रोडमेप टू फियरलेस इंटरपिनर्शिप’ का विमोचन राजकुमार जैन अजमेरा, हजारीबाग ने किया। श्री सम्मेदशिखरजी जो एक सुदूरवर्ती गांवों से घिरा क्षेत्र है। यहां का पावन वातावरण इस विमोचन समारोह को और भी विशेष बनाता है। डॉ. जैन को इस पुस्तक के लिए जैन धर्म के कई गुरुओं, मुनि महाराज और आर्यिका माता जी का आशीर्वाद प्राप्त है। जो पुस्तक की आध्यात्मिक और सामाजिक महत्ता को और बढ़ाता है। आयोजकों का मानना है कि यह तीर्थस्थल न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। बल्कि प्रेरणा, ज्ञान और सामाजिक-आर्थिक विकास का स्रोत भी है। इस आयोजन के माध्यम से यह स्पष्ट और प्रेरक संदेश है कि डर को त्यागें, आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाएं और अपने सपनों को साकार करें।

जानकारी के अनुसार पुस्तक के लेखक डॉ. पंकज जैन, हजारीबाग, झारखंड निवासी और ब्लू ओशीन स्टील्स के सह-संस्थापक हैं, जो भारत की सबसे तेजी से उभरती विशेष स्टील सप्लाई चेन मैनेजमेंट कंपनियों में से एक है। 33 वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने 18$ स्टील प्लांट्स को जोड़ने वाला एक अभिनव सप्लाई चेन मॉडल विकसित किया है। सस्टेनेबिलिटी में पीएचडी डॉ. जैन ने नेतृत्व को लाभ के बजाय उत्तरदायित्व से जोड़ने की अनूठी दृष्टि प्रस्तुत की है। उन्होंने 260 से अधिक वर्कशॉप्स आयोजित कीं। 10 हजार से अधिक प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित किया और आईआईटी, कॉर्पाेरेट्स और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 150 से अधिक प्रेरक भाषण दिए। “ले छलांग!” न केवल उद्यमिता की मार्गदर्शक है, बल्कि आत्मिक और वैचारिक जागरण का सशक्त माध्यम भी है।

‘ले छलांग!’ डर और हिचकिचाहट को दूर करने का प्रभावी माध्यम

विमोचन समारोह मुख्य अतिथि राजकुमार जैन अजमेरा रहे। राजकुमार जैन अजमेरा, जो श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर ट्रस्ट, मधुबन के महामंत्री हैं। श्री सम्मेदशिखरजी में अनेक जनकल्याणकारी कार्यों से जुड़े हैं। वे भारत वर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी, श्रीसेवातन, गुणायतन न्यास, सम्मदानचल विकास समिति जैसी संस्थाओं के साथ-साथ झारखंड की विभिन्न व्यापारिक और धार्मिक संस्थाओं में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। उनके प्रेरक उद्बोधन ने उपस्थित श्रोताओं में उद्यमिता और समाज सेवा के प्रति नया जोश और उत्साह जगाया। साथ ही राजकुमार जैन अजमेरा के ओजस्वी विचारों ने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ‘हमने कई अवसरों पर देखा और अनुभव किया है कि श्री सम्मेदशिखरजी के सुदूरवर्ती गांवों के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

ये युवा अपनी क्षमताओं से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं, किंतु कुछ में आत्मविश्वास की कमी के कारण वे अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते। ऐसे युवाओं के लिए ‘ले छलांग!’ पुस्तक क्रांतिकारी और प्रेरणादायी साधन है। इसी कारण आज यह आयोजन को इस क्षेत्र में करना मकसद रहा है।’ जैन ने कहा कि ‘मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह पुस्तक श्री सम्मेदशिखरजी ही नहीं देश और विश्व भर के उन युवाओं के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक सिद्ध होगी, जो उद्यमिता की राह पर कदम रखना चाहते हैं। ‘ले छलांग!’ डर और हिचकिचाहट को दूर करने का प्रभावी माध्यम है। यह पुस्तक व्यावहारिक रणनीतियों और स्पष्ट रोडमैप के माध्यम से उद्यमियों को आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती है।

‘सरल और सुंदर शब्दों में लिखी गई कृति’

विमोचन समारोह में उपस्थित श्रोताओं ने डॉ. जैन के अनुभवों और ‘ले छलांग!’ के संदेश से गहरी प्रेरणा ग्रहण करते हुए पुस्तक की शैली की सराहना की श्रोताओं ने एक सुर में कहा कि ‘सरल और सुंदर शब्दों में लिखी गई यह कृति न केवल पढ़ने में आसान है, बल्कि हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है।’ इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि तीर्थस्थल केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रेरणा के जीवंत केंद्र भी हैं। श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर ट्रस्ट, मधुबन सभी उद्यमियों, समाजसेवियों और प्रेरणा की तलाश में रहने वाले व्यक्तियों, विशेष रूप से सुदूर क्षेत्रों के युवाओं को ‘ले छलांग!’ पढ़ने और इसके संदेश को आत्मसात करने के लिए हार्दिक आमंत्रण देता है। वर्तमान में पुस्तक इंग्लिश भाषा में उपलब्ध है। जल्द ही हिन्दी भाषा में भी पुस्तक उपलब्ध की जाएगी। इस अवसर पर मधुबन की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित देश-विदेश से आए अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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