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अष्टाहिंका महापर्व का छठा दिन : कर्म काटने वाला बड़ा होता है – आचार्य श्री प्रमुख सागर


स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कर्म बलवान नहीं होता है, कर्म को काटने वाला बलवान होता है। कर्म भया वस्तु है। जैसा तुम भाव करते हो वैसा ही कर्मों का वध होता है। पढ़िए सुनील सेठी की रिपोर्ट…


गुवाहाटी। स्थानीय एमएस रोड स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे अष्टाहिंका महापर्व के छठे दिन शनिवार को आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्म बलवान नहीं होता है, कर्म को काटने वाला बलवान होता है। कर्म भया वस्तु है। जैसा तुम भाव करते हो, वैसा ही कर्मों का वध होता है।

कर्म दो प्रकार के हैं शुभ कर्म, दूसरा अशुभ कर्म। यदि हम चोरी-चकारी, ईर्ष्या इत्यादि करेंगे तो हम में अशुभ कर्मों का असर होगा और यदि हम दया भाव रखेंगे, सेवा भाव रखेंगे, पूजा भक्ति आदि करेंगे, तो हम में शुभ अक्षय का वध होगा। फिर हमें वैसा ही फल मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस सिद्धचक्र मंडल विधान पूजन के माध्यम से जो लोग विनय पूर्वक सिद्ध परमेष्ठी की आराधना भक्ति भाव से कर रहे हैं, वे सब पुण्यशाली जीव हैं।

आचार्य श्री (ससंघ) के निर्देशन में श्रीजी का अभिषेक व शांतिधारा करने के तत्पश्चात इंद्र इंद्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों द्वारा संगीतमय स्वर लहरियों के साथ पूजा-अर्चना कर विधान के 256 अर्घ्य चढ़ाए गए। यह जानकारी समाज के प्रचार प्रसार विभाग के मुख्य संयोजक ओमप्रकाश सेठी एवं सह संयोजक सुनील कुमार सेठी ने दी।

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