संत परिचय

संत परिचय-13 : आज पढ़िए आचार्य श्री विहर्षसागरजी महाराज का परिचय


श्रीफल जैन न्यूज की ओर से जैन संतों और साध्वियों की परिचय की श्रृंखला शुरू की जा रही है। जैन धर्म में मुनि बनना एक बहुत साहसिक और वैराग्य पूर्ण कार्य है। हर कोई व्यक्ति मुनि नहीं बन सकता। जैन दर्शन में मुनियों के आचार- विचार और दिनचर्या पर बहुत ही स्पष्ट और सख्त नियम बनाए हैं। श्रीफल जैन न्यूज का उद्देश्य है कि इस श्रृंखला के जरिए पाठक जान सकें कि जैन धर्म जीवन जीने की कला है। यह अध्यात्म और विज्ञान पर आधारित जीवन मार्ग है और इनके बारे में पढ़कर लोग धर्म की राह पर चल सकें। इसी श्रृंखला की चौथी कड़ी में आज प्रस्तुत है डॉक्टर जैनेंद्र जैन एवं राजेश जैन दद्दू की कलम से आचार्य श्री विहर्षसागरजी सागर महाराज के बारे में…


7 मार्च 1970 को बुंदेलखंड की वसुंधरा बीना जिला सागर में धर्मश्रेष्ठी स्वर्गीय दीपचंद जैन एवं स्वर्गीय आशादेवी जैन (समाधिस्थ आर्यिका सन्मति माताजी) के घर आंगन में जन्मे विनोद उर्फ बंटी भैया आज हम सबके बीच गणाचार्य विराग सागर जी महाराज से दीक्षित आचार्य विहर्षसागरजी नाम से देशभर में अपने त्याग, तपस्या, चर्या और ज्ञान से श्रमण संस्कृति एवं नमोस्तु शासन को जयवंत कर रहे हैं।

युवावस्था में हुआ वैराग्य उत्पन्न

इंटर तक शिक्षित विनोद उर्फ बंटी भैया के मन में युवावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही वैराग्य उत्पन्न हो गया और माता-पिता की अनुमति एवं गणाचार्य विराग सागरजी से आशीर्वाद प्राप्त कर आप आचार्य श्री के संग में बाल ब्रह्मचारी के रूप में सम्मिलित होकर अध्ययन, मनन और चिंतन कर धर्म साधना करने लगे। आपकी भक्ति, श्रद्धा एवं मन में उपजे वैराग्य को देखकर गणाचार्य विरागसागरजी ने 23 फरवरी, 1996 को देवेंद्र नगर (पन्ना) में आपको ऐलक दीक्षा एवं 14 दिसंबर 1998 को दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बरासो जिला भिंड में मुनि दीक्षा प्रदान कर मुनि विहर्ष सागर बना दिया, तब से आज तक आप देशभर में पद त्राणविहीन चरणों से पदयात्रा करते हुए श्रमण संस्कृति की धर्म ध्वजा फहरा रहे हैं। आप विहर्ष वाणी के माध्यम से जगत कल्याणी जिनेंद्र वाणी को जन-जन में प्रचारित/ प्रसारित कर रहे हैं।

आचार्य पद पर हुआ आरोहण

13 फरवरी, 2023 को विरागोदय तीर्थ पथरिया जिला दमोह में गणाचार्य विरागसागरजी महाराज ने हजारों लोगों की उपस्थिति एवं सैकड़ों संतों के सानिध्य में आपको आचार्य पद प्रदान किया। आचार्य पदारोहण के बाद आचार्य विहर्षसागरजी का धर्म नगरी इंदौर में पहला चातुर्मास होगा। इसके पूर्व मुनि अवस्था में जबलपुर, भिंड, जगदलपुर, भिलाई, राजनाद गांव, बीना, झांसी, ग्वालियर, आगरा एवं दिल्ली आदि शहरों में चातुर्मास कर धर्म की महती प्रभावना कर चुके हैं। आपने मेरठ में वर्ष 2018 में आर एस एस के प्रमुख श्री मोहन भागवत के सानिध्य में हजारों आर एस एस के कार्यकर्ताओं को एवं नफजगढ़(दिल्ली) मे सीआरपीएफ के जवानों को थी संबोधित करने का सौभाग्य अर्जित किया है।

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