अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस एवं संयम दिवस के अवसर पर 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन चल रहा है। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई को हुआ। सोमवार को 39 वां दिवस मनाया गया। अयोध्या में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दिल्ली, लखनऊ, टिकैत नगर के भक्त परिवार ने अपने घर में माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया। अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
अयोध्या। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की संघस्थ सुरभि दीदी जी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्म दिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव चल रहा है। उन्होंने कहा कि गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के अनेक भक्तांे ने अपने मनोगत में कहा कि श्री ज्ञानमती माताजी दीर्घायु हों, माताजी का अधिक से अधिक समय तक हमें धर्म लाभ मिलता रहे। माताजी के सानिध्य में उनकी जन्म शताब्दी मनाने का अवसर मिले, ऐसी भावना व्यक्त की। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई को हुआ। सोमवार को 39 वां दिवस मनाया गया। अयोध्या में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दिल्ली, लखनऊ, टिकैत नगर के भक्त परिवार ने अपने घर में माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया।
सेमवार को इनके घर में मना रत्नत्रय महोत्सव
थ्जनराज मंजू जैन, आयुषी, जीनांशी, कैवल्या जैन, सुरभि जैन, योगेश जैन, मयंक हिमानी जैन, सम्यक जैन रेनु जैन, सिविल लाइन दिल्ली, नरेंद्र किरण जैन, धन्नू ममता जैन, बिजेंद्र तृप्ति जैन, अतिशय सुभागंनि जैन, पारस, तन्मय, शुभ जैन ज्ञान ज्योति परिवार निराला नगर, लखनऊ, अरविंद बीना जैन, पारस मोनिका जैन, विमन्यु दृष्टि जैन, श्रेयश, सम्यक जैन, टिकैत नगर में रत्नत्रय महोत्सव मनाया गया। सभी ने अपने घरो में आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की तस्वीर रखकर उसके सामने सजावट कर अष्टद्रव्य से आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज और आर्यिका ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी भक्तांे ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी श्री चंदनामती माताजी ने सभी भक्तांे को आशिर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के मुखारविंद से ’तीर्थंकर देशना’ सत्र के अंतर्गत गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की लेखनी से प्रस्तुत ’कल्याण कल्पतरु स्तोत्र’ जैसी विलक्षण रचना का अध्ययन भी कराया गया।













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