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धर्म और आत्मा का बंधन ही सच्चा रक्षाबंधन – आचार्य विनिश्चय सागर जी : श्रेयांशनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित, नगर हुआ धर्ममय


रामगंजमंडी में आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज के सानिध्य में रक्षाबंधन महोत्सव एवं श्रेयांशनाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक मनाया गया। निर्वाण लाडू अर्पित किए गए और पूरे नगर ने गुरुदेव संघ के प्रति पूर्ण समर्पण दिखाया। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की खास रिपोर्ट…


रामगंजमंडी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज के सानिध्य में रक्षाबंधन महोत्सव एवं श्रेयांशनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि सच्चा रक्षाबंधन धर्म और आत्मा का बंधन है। दिगंबरत्व का सही परिचय निष्प्रहता से आता है, जिसका अर्थ है किसी भी प्रकार की चाह न होना। उन्होंने कहा कि आत्मा को धर्म से बांधना ही वास्तविक रक्षाबंधन है, और जब आत्मा सही ढंग से धर्म में बंधती है तो जीवन सार्थक हो जाता है।

आचार्य श्री ने विष्णुकुमार मुनि की कथा सुनाते हुए बताया कि रक्षा सूत्र केवल एक प्रतीक है, वास्तविक रक्षा तब होती है जब आत्मा धर्म में डूब जाती है। उन्होंने समर्पण को शब्दों से नहीं, बल्कि आचरण से प्रकट होने वाला बताया।

वातावरण धर्म-भक्ति से ओतप्रोत हो गया

रक्षाबंधन पर्व पर श्रेयांशनाथ भगवान का अभिषेक पूजन कर निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। नगर में पहली बार ऐसा दृश्य देखने को मिला जब पूरा संघ एक साथ आहार के लिए निकला और वातावरण धर्म-भक्ति से ओतप्रोत हो गया। श्रद्धालुओं में आचार्य श्री संघ के प्रति गहरी आस्था और पूर्ण समर्पण दिखाई दिया।

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