आचार्य पट्टाचार्य के शिष्य मुनिश्री के भक्त परिवार में कुछ ट्रस्टियों की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराज़गी व्यक्त की जा रही है। मुनिश्री ने वाशिम में चातुर्मास एवं दो पंचकल्याणक गजरथ महोत्सवों के माध्यम से अनेक श्रद्धालुओं को जैन धर्म, अभिषेक, पूजन एवं दान के लिए प्रेरित किया। वाशिम से पढ़िए, प्रशांत गड़ेकर की रिपोर्ट…
वाशिम। आचार्य पट्टाचार्य के शिष्य मुनिश्री के भक्त परिवार में कुछ ट्रस्टियों की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराज़गी व्यक्त की जा रही है। मुनिश्री ने वाशिम में चातुर्मास एवं दो पंचकल्याणक गजरथ महोत्सवों के माध्यम से अनेक श्रद्धालुओं को जैन धर्म, अभिषेक, पूजन एवं दान के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2026 में शिरपुर जैन मंदिर में दो घंटे के लिये सामायिक साधना के लिए कक्ष उपलब्ध कराने में वाशिम के मुख्य प्रवक्ता एवं सचिव ने साधक बाधक चर्चा कर टालमटोल किए जाने का आरोप गुरु भक्तों ने लगाया। णमो लोए सव्व साहूणं जैसे जैन सिद्धांतों को भूलकर कुछ ट्रस्टी विवाद उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसा मत व्यक्त किया गया। वर्ष 1970 के पंचकल्याणक महोत्सव के इतिहास में गलत जानकारी प्रस्तुत करने, दिवंगत व्यक्तियों को जीवित दर्शाने तथा पूजनीय संतों के नामों को लेकर भ्रम फैलाने के आरोप लगाए गए। तो 2019 के पंचकल्याणक महोत्सव में दिए गए आश्वासन की पूर्ति आज तक नहीं की। इस संबंध में वाशिम शहर पुलिस स्टेशन एवं धर्मादाय न्यास कार्यालय में शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। मंदिर के आर्थिक कार्यों में पारदर्शिता की कमी, सीसीटीवी बंद रखना, स्वयं का सम्मान समारोह करना तथा समाज के धन के दुरुपयोग जैसे आरोप भी लगाए गए। गुरुदेव के आशीर्वाद से प्राप्त अक्षय पात्र पर नाम बदलने का प्रयास किए जाने का दावा भी भक्तों ने किया। जैन समाज में एकता बनाए रखते हुए साधु-संतों का सम्मान कायम रखने की मांग समाजबंधुओं द्वारा की जा रही है। यह भूमिका प्रशांत गडेकर ने व्यक्त की।













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