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श्रद्धा से शक्ति स्वयं ही आ जाती है : मुनि श्री जयंत सागर जी ने प्रेम, श्रद्धा और आस्था का बताया महत्व


मुनि श्री जयंत सागर जी ने गुरुवार को अपने प्रवचन में कहा कि धर्म के प्रति श्रद्धा है तो स्वतः ही अंदर में शक्ति आ जाती है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…


नांद्रे। मुनि श्री जयंत सागर जी ने गुरुवार को अपने प्रवचन में कहा कि धर्म के प्रति श्रद्धा है तो स्वतः ही अंदर में शक्ति आ जाती है। जहाँ और जिससे व्यक्ति को प्रीति होती है तो व्यक्ति कितना भी अस्वस्थ हो, परंतु कोई उसका करीबी आ जाए तो व्यक्ति जिसको बिस्तर से उठने की ताकत नहीं थी परंतु प्रिय मित्र के आने पर उसको शक्ति स्वतः ही आ जाती है और जहाँ श्रद्धा होती है वहाँ किसी को कोई कार्य करने को कहना नहीं पड़ता। वह कार्य करने का और धर्म करने की स्वयं ही इच्छा होने लगती है। इसलिए जीवन में श्रद्धा बढ़ाओ, प्रीति बढ़ाओ। जहाँ प्रीति प्रेम होता है वहाँ सब आपके बन जाते हैं। हर जगह सम्मान मिलता है, आदर मिलता है। जिनके अंदर श्रद्धा, आस्था, स्नेह, प्रेम, प्रीति नहीं होती उनका संसार बहुत न्यून ही होता है।संसार में उसका कोई आदर सम्मान नहीं करता और फिर ऐसे व्यक्ति को जीवन की इच्छा ही नहीं होती।

इसलिए जीवन में श्रद्धा है, आस्था है, प्रीति है तो हमें कभी किसी के सामने कुछ कहने की आवश्यकता नहीं होती। अपने अंदर शक्ति स्वयं ही आ जाती है। उल्लेखनीय है कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागर जी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में विराजमान हैं।

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