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शिक्षण शिविरों में व्यक्तित्व होता है सुसंस्कारित - बा.ब्र. संजय भैयाजी   400 से अधिक बंधु शिविर में हो रहे हैं शामिल


प्रत्येक सांसारिक प्राणी को अपने धर्म, अपनी संस्कृति, अपनी परम्पराओं का ज्ञान होना चाहिए। कोई व्यक्ति कितना भी पढ़ा लिखा, होशियार, चतुर चालाक क्यों न हो, यदि उसे अपने धर्म, अपनी संस्कृति और अपनी परम्पराओं का ज्ञान नहीं हैं तो उसका जीवन सुसंस्कारित नहीं हो सकता। शिक्षण शिविरों के माध्यम से बुजुर्ग, युवा, बच्चें सभी को यही शिक्षा प्रदान की जाती है। पढि़ए मनोज जैन नायक की पूरी रिपोर्ट…     


 मुरैना। प्रत्येक सांसारिक प्राणी को अपने धर्म, अपनी संस्कृति, अपनी परम्पराओं का ज्ञान होना चाहिए। कोई व्यक्ति कितना भी पढ़ा लिखा, होशियार, चतुर चालाक क्यों न हो, यदि उसे अपने धर्म, अपनी संस्कृति और अपनी परम्पराओं का ज्ञान नहीं हैं तो उसका जीवन सुसंस्कारित नहीं हो सकता। शिक्षण शिविरों के माध्यम से बुजुर्ग, युवा, बच्चें सभी को यही शिक्षा प्रदान की जाती है। जिससे व्यक्ति सुसंस्कारित होता है। उक्त कथन आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सुशिष्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी मुरैना ने बड़ा जैन मंदिर मुरेना में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के दौरान शिवरार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।

ग्रीष्मकालीन अवकाश में मुरैना नगर के श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में गुरु उपकार महोत्सव के अंतर्गत आठ दिवसीय शिक्षण शिविर का आयोजन 19 मई से 26 मई तक चल रहा है। जिसमें 400 से अधिक बुजुर्ग, माता बहिनें युवा एवं बच्चें भाग ले रहे हैं ।

शिविर के मुख्य संयोजक प्राचार्य वीरेंद्र जैन बावा एवम शिविर प्रभारी नवनीत जैन शास्त्री ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर में प्रतिदिन प्रात: श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन कराया जाता है। प्रात: 7 बजे से 9 बजे तक कक्षाएं लगती हैं। शाम को कक्षाओं के साथ ही आरती, प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पुरस्कार वितरित किए जाते हैं। शिविर में 70/75 साल के बुजुर्गों एवं महिलाओं के साथ नन्हें-मुन्ने बच्चें बहुतायत संख्या में शिविर में सम्मिलित हो रहे हैं। सांगानेर जयपुर के जैन दर्शन के युवा विद्वानों द्वारा सभी को शिक्षण प्रदान किया जा रहा है। शिविर के समापन पर सभी की परीक्षाएं होगी और योग्यतानुसार सभी को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार वितरित किए जाएंगे।

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