इंदौर के समर्थ सिटी जिनालय में भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी जी का 2802वां निर्वाण महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव से पूज्य आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुआ। समारोह में सम्मेद शिखर विधान, अभिषेक, शांति धारा और लाडू अर्पण जैसे धार्मिक क्रियाकलाप हुए। पढ़िए पूरी खबर…
इंदौर। जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी जी का 2802वां निर्वाण कल्याणक महोत्सव इंदौर के पश्चिम क्षेत्र स्थित श्री पार्श्वनाथ जिनालय, समर्थ सिटी में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव से मनाया गया। समारोह का शुभारंभ पूज्य आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ससंघ के सानिध्य में हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री सम्मेद शिखर विधान, महामस्तकाभिषेक, शांति धारा और लाडू अर्पण जैसे अनुष्ठान संपन्न हुए।
विधान करवाने का सौभाग्य श्री संतोष जी, सौरभ, आशीष जैन परिवार को प्राप्त हुआ। पार्श्वनाथ भगवान के प्रथम अभिषेक का लाभ अखिलेश प्राचीन जैन परिवार ने लिया, वहीं प्रथम शांति धारा का सौभाग्य चर्चित ओम कीर्ति पाटोदी परिवार को मिला। द्वितीय एवं तृतीय शांति धारा का लाभ सौरभ-आशीष जैन, शरद कुमार, सौमिल, सुलभ जैन परिवार और ऋषभ-मोना जैन परिवार को मिला। निर्वाण लाडू चढ़ाने का लाभ ऋषभ मोना जैन, श्रेयस-सविता जैन, अमीरचंद जैन, अखिलेश-प्राची जैन, सुभाष चंद्र-श्रेय जैन एवं अनिल कुमार जैन परिवार ने प्राप्त किया।
आत्मिक निर्वाण की ओर ध्यान नहीं देते
श्री जी के चतुर्थ कोण अभिषेक का सौभाग्य श्रेयांस जैन, सुभाष जैन, पवन मोठिया, महेन्द्र जैन, विकास जैन, इशांक जैन, डॉक्टर सतीश जैन और संतोष मामाजी परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र जैन और सुलभ जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर पूज्य आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ने प्रवचन में कहा कि हम लोग आज भी केवल भौतिक निर्माण में लगे हैं, और आत्मिक निर्वाण की ओर ध्यान नहीं देते। भगवान पार्श्वनाथ ने क्रोध, मान, माया, लोभ रूपी ईंट-चूने की दीवारें तोड़कर आत्म अवलोकन द्वारा मोक्ष मार्ग प्राप्त किया।
भावपूर्ण वंदना कर नरक और पशु गति से बच सकते हैं
उन्होंने बताया कि आज का दिन विशेष है क्योंकि भगवान पार्श्वनाथ ने इसी दिन सम्मेद शिखर जी के स्वर्ण भद्रकूट पर सभी कर्मों का नाश कर मोक्ष प्राप्त किया था। आर्यिका श्री ने कहा कि हम भले ही आज शिखरजी पर्वत पर नहीं हैं, लेकिन इस मंडल विधान के माध्यम से भावपूर्ण वंदना कर नरक और पशु गति से बच सकते हैं। इस पूरे आयोजन की जानकारी वर्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी और समाज अध्यक्ष शैलेष चंदेरिया ने दी।













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