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सूर्य पहाड़ पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव : जहां पंचकल्याणक वह भूमि तीर्थ हो जाती है- आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज 


श्री दिगंबर जैन पंचायत, गुवाहाटी के तत्वाधान में सूर्य पहाड़ पर हो रही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन गर्भकल्याण महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गर्भकल्याण महोत्सव की महत्ता के बारे में बताया। पढ़िए सुनील कुमार सेठी की रिपोर्ट। 


गुवाहाटी : पंचकल्याण महोत्सव का दूसरा दिन गर्भ कल्याणक के रूप में बनाया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को इसकी महत्ता के बारे में बताया और कहा की हमारा भारत गर्भपात की विकृति को अपनाने के कारण ही गर्त मे चला गया है। क्योंकि हम पश्चात्य संस्कृति तार से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर प्रभु का ही गर्भ कल्याणक मनाया जाता है, क्योंकि पूर्वभर्वो में उन्होंने सोलह- कारण भावना पढ़कर तीर्थंकर मुक्ति का बंध किया था। आचार्य श्री ने कहा गर्भकल्याण महोत्सव सबको गर्व के साथ स्वीकार करना चाहिए, जिससे हमारा भी मर्म कल्याणक हो। इस मौके पर संध्याकालीन आरती करने का सौभाग्य सुरेंद्र कुमार- प्रीति देवी छाबडा़ परिवार एवं अजय कुमार- रूपा देवी रारा परिवार को प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम में पूर्वोत्तर समेत पूरे भारत से श्रद्धालु पहुंचे हैं। इससे पूर्व प्रथम दिन पंचकल्याणक का प्रारंभ घट यात्रा व ध्वजारोहण के साथ हुआ।

तीर्थंकर भगवान की शाश्वत जन्मभूमि इस काल की अयोध्या

श्री दिगंबर जैन पंचायत, गुवाहाटी के तत्वाधान में आयोजित इस समारोह में आचार्य श्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा की पंचकल्याणक में पाँच महोत्सव होते हैं जन्म,गर्भ, तप, ज्ञान, मोक्ष कल्याणक। यह पांचो महोत्सव उसी के होते हैं, जो पांचो पापों से बचते हैं। ऐसे जीव पंच परावर्तन पूर्ण करके पंचम गति के मेहमान बनते हैं। उन्होंने कहा कि नर से नारायण, पशु से परमेश्वर, कंकर से शंकर, शंकर से तीर्थंकर की यात्रा का नाम है पंचकल्याण। जिस भूमि पर साक्षात तीर्थंकर भगवान का पंचकल्याणक होता है वह भूमि तीर्थ हो जाती है।

तीर्थंकर भगवान की शाश्वत जन्मभूमि इस काल की अयोध्या है और मोक्ष भूमि सम्मेद शिखर है। उन्होंने कहा कि इस भूमि का पुण्य तीव्र उदय है जो यहां पंचकल्याण की महापूजन होने जा रही है। उन्होंने कहा कि भगवान राम 22 जनवरी को अपने महल- मंदिर में विराजमान हो गए हैं। वैसे ही सूर्य पहाड़ के भगवान आदिनाथ भी अपनी वैदियो-सिंहासनो पर विराजमान होने जा रहे हैं। इससे पूर्व ध्वजारोहन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, मंगल कलश स्थापन, संध्याकालीन आरती आदि गणमान्य व्यक्तियों द्वारा किया गया।

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