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मंगल का प्रतीक माना गया है दीपावली पर मिट्‌टी का दीया जलाना: पंच तत्वों का प्रतीक है मिट्टी के दीये


दीपों का त्योहार दीपावली। दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाना मंगल का प्रतीक माना गया है। मिट्टी के दीयों का अलग ही महत्व है। पांच तत्वों के प्रतीक हैं ये मिट्टी के दीये। दिवाली खुशियों वाली अभियान के तहत पढ़िए एक रिपोर्ट


मिट्टी के दीये पंच तत्वों का प्रतीक है। दीये को पानी व मिट्टी से बनाया जाता है जो भूमि तत्व व जल तत्व का प्रतीक है। दीये बनाने के बाद उसे धूप व हवा में सुखाया जाता है जो आकाश व वायु तत्व है। अंत में आग में तपाकर बनाया जाता है जो अग्नि तत्व है। इस तरह पांच तत्व से दीये तैयार होते हैं। साथ ही इससे प्रदूषण कम होता है। जो पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इसलिए मिट्टी के दीये का ही प्रयोग करें।

सकारात्कम ऊर्जा का प्रभाव 

घी का दीया जलाने ने से घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है। इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई रूप से निवास होता है। घी को पंचामृत यानी पांच अमृतों में से एक माना गया है। किसी भी सात्विक पूजा का पूरा फल प्राप्त करने के लिए घी का दीया और तामसिक यानी तांत्रिक पूजा काे सफल बनाने के लिए तेल का दीपक लगाया जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है। आमतौर पर विषम संख्या में दीप प्रज्जवलित करने का प्रचलन है।

नई ऊर्जा का होता है संचार

घी के अंदर एक सुगंध होती है जो जलने वाले स्थान पर काफी देर तक रहती है। इसी कारण वह स्थान शुद्ध हो जाता है। इससे कई तरह की बीमारियों से भी बचाव होता है। इसके अलावा आध्यात्म के अनुसार हमारे शरीर में सात ऊर्जा चक्र होते हैं, घी का दिया जलाने से यह चक्र जागृत हो जाते हैं। इससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। वहीं अगर घी में लौंग डाल दिया जाए तो इससे निकलने वाला धुंआ घर के लिए एयर प्यूरीफायर का काम करता है। जो चर्म रोग से निजात दिलाने में मदद करता है।

ज्ञान का प्रतीक है दीये की रौशनी

वैदिककाल में होने वाले सोमयज्ञ में तमसो मा ज्योतिर्गमय मंत्र पढ़ा जाता था। इस प्रार्थना का अर्थ है कि मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। इसलिए दीपक की रोशनी को ज्ञान का प्रतीक माना गया है। पुराणों में दीपक को सकारात्मकता का प्रतीक व दरिद्रता को दूर करने वाला भी कहा गया है।

रोग खत्म होते हैं

सूर्यास्त के बाद घर के मुख्यद्वार के पास दीपक जलाने से उस घर में रहने वाले लोगों की उम्र बढ़ती है। साथ ही रोग खत्म होने लगते हैं। इसके साथ ही मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। दीपक के लिए रुई की बत्ती का उपयोग करना चाहिए। घी के अलावा तिल के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

ये भी हैं लाभ – 

मिट्टी के दीपक जलाने से वातावरण प्रदूषित होने की संभावना कम होती है.

मिट्टी के दीपक में देसी गाय के दूध से बना घी जलाने से रोगाणुओं को मारा जा सकता है.

सरसों के तेल में मौजूद तत्वों से वातावरण में मौजूद रसायनों के साथ प्रतिक्रिया होकर विषैले तत्व, कीट-पतंगे और रोगाणु खत्म हो जाते हैं.

पीतल का दीपक जलाने से देवी-देवता आयु और आय का आशीर्वाद देते हैं.

चांदी का दीपक प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक होता है.

आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए घर के देवालय में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए.

आश्रम और देवालय में अखंड ज्योत जलाने के लिए शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाना चाहिए

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