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आत्मिक सुख के लिए ही आएं पंचकल्याणक में

इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। पंचकल्याणक की बेला तत्व के उपदेश को ग्रहण करने की बेला है। इंदौर का सौभाग्य है कि उसे निरंतर पंचकल्याणक महोत्सव देखने और उसमें भाग लेकर भगवान की पूजा-भक्ति करने और पाषाण से परमात्मा बनने की विधि को देखने का सौभाग्य मिल रहा है। पंचकल्याणक महोत्सव में घूमने-फिरने के लिए नहीं, आत्मिक सुख की प्राप्ति एवं अपने अंदर बैठे भगवान की प्रतिष्ठा कैसे हो, यह जानने-सीखने के उद्देश्य से आएं, तभी तुम्हारा पंचकल्याणक मैं आना सार्थक होगा।

यह बात श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने श्री नेमिनाथ जिन बिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिन महावीर नगर में आयोजित महोत्सव में आए हजारों भक्तों की उपस्थिति में कही। मुनि श्री ने कहा कि जो अपने मान-अपमान की स्थिति में भी समता और शांति रखता है, उसका व्यक्तित्व बड़ा होता है।

प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ पूलक चेतना मंच के निर्देशन एवं मुनिश्री आदित्य सागर जी, अप्रमितसागर जी एवं मुनि श्री सहज सागर जी के सानिध्य में कनाडिया रोड के नए जैन मंदिर से प्रारंभ भव्य एवं विशाल घट यात्रा जुलूस से हुआ। जुलूस में एक दर्जन बग्घियों में सौधर्म इंद्र-इंद्राणी, कुबेर, भगवान के माता-पिता, विधि एवं महायज्ञ नायक और अन्य प्रमुख पात्र बैठे थे।

सैकड़ों की संख्या में पुरुष सम्मिलित हुए और महिलाएं सिर पर मंगल कलश लिए एवं हाथों में जैन ध्वज लिए लहराते हुए एवं मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। जुलूस में सम्मिलित कर्नाटक का प्रसिद्ध चिंडे बैंड अपने वाद्य यंत्रों से सुमधुर ध्वनि प्रवाहित कर रहा था। स्थानीय बैंड के कलाकार ने भजनों से समां बांधा।

जुलूस के महोत्सव स्थल महावीर नगर पहुंचने पर समाजसेवी सुनील मीना जैन ने मुनि संघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया एवं राजेश सुखदयाल लारेल ने जयकारा और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मंडप का उद्घाटन किया। समारोह का संचालन हंसमुख गांधी एवं पंडित अरविंद शास्त्री ने किया। इस अवसर पर पंडित रतनलाल शास्त्री, विधायक महेंद्र हार्डिया, एमआईसी मेंबर राजेश उदावत, पार्षद राजीव जैन,प्रदीप बड़जात्या,डॉक्टर जैनेंद्र जैन आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे।

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