मुनिश्री सुधासागर जी महाराज नगर के सुभाषगंज स्थित जिनालय में धर्मसभा में प्रवचन कर रहे हैं। रोज उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन यहां पहुंच रहे हैं। उनकी वाणी सुनकर वे धर्म-ज्ञानार्जन कर रहे हैं। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर…
अशोकनगर। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज नगर के सुभाषगंज स्थित जिनालय में धर्मसभा में प्रवचन कर रहे हैं। रोज उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन यहां पहुंच रहे हैं। उनकी वाणी सुनकर वे धर्म-ज्ञानार्जन कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने अपने प्रवचन में कि यदि हमारे चारों तरफ पुण्य आत्मा हो तो हमारा पाप भी कम हो जाता है, पुण्य बढ़ जाता है, उनके घर में कोई भी व्यक्ति ऐसा पुण्य लेकर नहीं आया था कि मैं अकाल में हीं मरूँगा लेकिन, तीर्थंकर के पुण्य से कोई अकाल में नहीं मरता और यदि गर्भ में ऐसा कोई पापी जीव आ जाए तो बड़े-बड़े पुण्यात्माओं का भी पुण्य क्षय हो जाता है। संगति क्यों कराई जाती है क्योंकि, संगति से भी हमारा पाप, पुण्य में परिवर्तित होता है और हमारा पुण्य, पाप में भी परिवर्तित होता है।
निमित्त के अनुसार हमारे कर्मों की उदीरणा होती है। निमित्त मिलने पर भी कर्मों का संक्रमण होता है। जो किस्मत ने लिखा है वही होगा, नहीं हम किस्मत बदल सकते हैं। कितनी भी बुरी किस्मत हो मत घबराना, जो आज चरवाहे थे एक दिन के बाद राजा बन गए और कितनी ही अच्छी किस्मत हो मत इतराना, आज जो राजा बनने वाले थे, कल वे जंगलों में जाते दिखते हैं।
आत्मशक्ति को जागने का मूल सूत्र है समयसार
एक व्यक्ति के साथ हजार लोग खड़े रहते हैं और एक व्यक्ति बुलाए तो भी कोई साथ में नहीं आता। एक व्यक्ति की किस्मत में पीक दान भी सोने की है और एक व्यक्ति वो है जिसको सगाई में मिली अंगूठी भी रोल्ड गोल्ड की है, ऐसा क्यों होता है? संसार में सबसे बड़ा कोई है तो वह है आत्मा, आत्मशक्ति को जागने का मूल सूत्र है समयसार आध्यात्म ग्रंथ, जिसमें मात्र आत्म शक्तियों का जागरण बताया गया है। उन आत्मसशक्ति के जागरण के लिए हम शुरुआत कैसे करे। सारा तीन लोक झुक सकता है लेकिन, एक बार आत्मशक्ति यदि जाग गयी तो वह कभी पराजित नहीं हो सकती। आत्मशक्ति जागृत होने के बाद तीन लोक उलट पलट जाये लेकिन, सिद्ध भगवान का कुछ भी नहीं होने वाला नहीं।
ब्रह्मांड हिल जाएगा शूली सिंहासन बन जाएगी
निज शक्ति जागरण के लिए थोड़ी थोड़ी सी बातों पर टेंशन नहीं करना है, थोड़ी-थोड़ी बातों पर बुरा नहीं मानना है, अंदर चिंतन करना है- कोई बात नहीं। अपनी छोटी सी भी गलती होने पर सीधा बोलना है, नहीं बहुत बड़ी बात है, आई एम सॉरी प्लीज। अपने से की हुई छोटी गलती हमें एक दिन बहुत बड़ा अपराधी बना देगी, इसलिए जब कोई छोटी सी गलती होवे उसे ताड़ बना दो और पश्चाताप की अग्नि में डाल दो अपने को। आपके प्रति दूसरे ने जो अपराध किया है तब भाव लाना है- कोई बात नहीं। फांसी का फंदा लग चुका है, मात्र बटन चटकाने की देरी है और उस समय तुम्हारी आत्मा से निकल जाए कोई बात नही, बस उसी समय ब्रह्मांड हिल जाएगा और शूली सिंहासन बन जाएगी, जैसे सेठ सुदर्शन। दुष्ट, मूर्ख, विक्षिप्त और नारी के सामने कभी सफाई मत देना। विद्वान, जज, गार्जियन, सज्जनों के सामने कभी कुछ छुपाना मत।













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