तत्वार्थ सूत्र शिक्षण सत्र के अंतर्गत आज के दिन का आयोजन अत्यंत सारगर्भित एवं ज्ञानवर्धक रहा। जैन मिलन स्वतंत्र शाखा एवं श्रमण संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ज्ञान और भक्ति की महत्ता बताई गई। बताया गया कि इस संसार में ज्ञान के समान दूसरा कोई सुखदायक साधन नहीं है। डबरा से पढ़िए, यह खबर…
डबरा। नगर में चल रहे तत्वार्थ सूत्र शिक्षण सत्र के अंतर्गत आज के दिन का आयोजन अत्यंत सारगर्भित एवं ज्ञानवर्धक रहा। जैन मिलन स्वतंत्र शाखा एवं श्रमण संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सत्र में आज मुख्य वक्ता के रूप में अमन भैया ने सम्यक ज्ञान की महिमा को हृदयस्पर्शी रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, ‘सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र ये तीनों ही मोक्ष मार्ग के लिए अनिवार्य हैं। आज हमने सम्यक ज्ञान पर विशेष रूप से केंद्रित होकर चिंतन किया। उन्होंने कहा कि ‘ज्ञान सामान न आन जगत में सुख का कारण।’ अर्थात इस संसार में ज्ञान के समान दूसरा कोई सुखदायक साधन नहीं है। जब तक आत्मा को सही और सच्चा ज्ञान प्राप्त नहीं होता, तब तक मोक्ष का द्वार नहीं खुलता। ज्ञान के पांच स्वरूपों मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान, अवधि ज्ञान, मनःपर्यय ज्ञान और केवलज्ञान का विवेचन करते हुए उन्होंने समझाया कि हमें प्रतिदिन यह भावना करनी चाहिए कि हे प्रभु! हमें भी एक दिन केवलज्ञान की प्राप्ति हो। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चा ज्ञान ही जीवन को दिशा देता है और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। पंडित अर्चित भैया ने बच्चों को सच्चे देव, शास्त्र और गुरु की पहचान के विषय में बताया और स्पष्ट किया कि इन पर अडिग श्रद्धा रखना ही सम्यक दर्शन कहलाता है।
उन्होंने कहा, इन तीन रत्नों की शरण में ही आत्मा की उन्नति संभव है। इसके अतिरिक्त उन्होंने बच्चों को पांच इंद्रियों के विषयों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि ये ही मोह का कारण बनकर आत्मा को संसार में भटकाते हैं। साथ ही उन्होंने पांच महापापों हिंसा, असत्य, चोरी, कुशीलाचार और परिग्रह के घातक प्रभावों से अवगत कराया और बताया कि ये जीव को नरक, तिर्यंच जैसी दुर्गति की ओर ले जाते हैं। अतः इनसे बचना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन प्रार्थना और भावना पाठ के साथ हुआ। सभी प्रतिभागियों ने शांति एवं आत्म कल्याण की भावना के साथ सत्र का पूर्ण लाभ उठाया।













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