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धर्मसभा में दिए प्रवचन : अनेकांत की दृष्टि ही हमें परमात्मा बना सकती है – मुनि पूज्य सागर


अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जैन कॉलोनी में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में मेरा कोई नही है, इस भाव से रहने वाला ही पुण्य करता है और परमात्मा बनता है। पढ़िए यह रिपोर्ट…


इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जैन कॉलोनी में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में मेरा कोई नही है, इस भाव से रहने वाला ही पुण्य करता है और परमात्मा बनता है। जो यह मानकर संसार में रहता है कि मेरा कोई नहीं है, वही वास्तव में संसार को समझकर पाप कर्म से बच सकता है। संसार में जो मिलता है, उसे मात्र हम एक संयोग मान लें और उसके जरिए जितना धर्म कर सकें, कर लेना चाहिए।

किराए के मकान में हम जिस प्रकार से रहते हैं, उसी प्रकार से संसार में रहना चाहिए। उस मकान में रहते ही भी मेरा नहीं है का भाव रहता है, बस इसी प्रकार संसार में मेरा कोई नहीं है का भाव रखना चाहिए। पुण्य-पाप बंध भावों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि ध्यान रखना शुभ उपयोग करते हुए ही शुद्ध उपयोग को प्राप्त किया जा सकता है। हमें एकांत नहीं, अनेकांत की दृष्टि से देखना चाहिए। अनेकांत की दृष्टि ही हमें परमात्मा बना सकती है।

हम मात्र शरीर आदि से धर्म करते हैं, इसलिए उसका उपयोग करें। गुरु आदि से शिक्षा तो मिलती है लेकिन ये भी मेरे शुद्ध उपयोग के लिए नहीं है। मुनि श्री पाद पक्षालन समाज के लोगों द्वारा किया गया। सभा में कैलाश लुहाड़िया, सुदर्शन जटाले, उर्मिला दोसी, कल्पना बाकलीवाल, सपना जैन, दमयंती लुहाड़िया, हेमंत पाटनी आदि अनेक समाज जन उपस्थित थे। इस मौके पर क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज ने बच्चों को पाठशाला में पढ़ाया।

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