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प्रथम समाधि दिवस पर 75 साधुओं का सानिध्य मिला: नेमीनगर में मना आचार्यश्री विरागसागर जी का समाधि दिवस


गणाचार्य विराग सागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस नेमी नगर में मनाया गया। प्रातःकाल आचार्य विनम्र सागर जी महाराज विजयनगर से, आचार्य श्री विशद सागरजी महाराज सुदामा नगर से, सुयश सागर जी रामचंद्र नगर से मंगल विहार कर इंद्रलोक कॉलोनी जिनालय पर एकत्रित हुए। यहां से शोभायात्रा बैंडबाजे के साथ नेमी नगर के लिए प्रारंभ हुई। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


 इंदौर। गणाचार्य विराग सागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस नेमी नगर में मनाया गया। प्रातःकाल आचार्य विनम्र सागर जी महाराज विजयनगर से, आचार्य श्री विशद सागरजी महाराज सुदामा नगर से, सुयश सागर जी रामचंद्र नगर से मंगल विहार कर इंद्रलोक कॉलोनी जिनालय पर एकत्रित हुए। यहां से शोभायात्रा बैंडबाजे के साथ नेमी नगर के लिए प्रारंभ हुई। जगह-जगह साधुओं के पाद प्रक्षालन किए गए। आरती उतारी गईं। सभी साधुओं की मंगल अगवानी एवं मंगल मिलन आचायश्री विभव सागर जी महाराज ने नेमीनगर गेट पर की। मंदिर पर सभी संतों के पाद प्रक्षालन किए गए। धर्म सभा में मंगलाचरण दीदी द्वारा किया गया एवं दीप प्रज्वलन समाज श्रेष्ठियों द्वारा किया गया। गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के चरण स्थापित कर प्रक्षालन का सौभाग्य आकाश, विकास, निर्मल पांड्या परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्यश्री विशद सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य अशोक आलोक जैन गंजबासौदा वालों को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सुरेश सेठी एवं पुलक मंच परिवार इंदौर को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य धर्मेंद्र सीनकाम एवं विजय नगर चातुर्मास समिति को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट का सौभाग्य संदीप गंगवाल पदमा गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

आचार्यों और मुनिराजों ने किया गुणानुवाद 

इस अवसर पर पूज्य आचार्य विनम्र सागर जी ने कहा कि आचार्य श्री विराग सागर जी अत्यंत दूर दृष्टि वाले थे। उन्होंने अपने साथ जहां बच्चों को शिक्षित किया तो बुजुर्गाे को दीक्षा प्रदान कर उनके जीवन को धन्य किया। आचार्य श्री ने कहा कि मैं विराग सागरजी अनुकंपा से ही आज संस्कृत सीख पाया हूं और जीवन में पानी की बूंद के 2006 छंद लिखकर समाज को समर्पित किया है। आचार्य श्री विशदसागर जी ने भी कहा कि उन्होंने हमें बच्चों जैसा पाल कर आगे बढ़ाया है। वही विभव सागर जी महाराज ने उनके जैसी उत्कृष्ट समाधी इस पंचमकाल मंे किसी साधु की नहीं हो पाई है। उन्होंने बालकों को पहचान कर शिक्षित कर समाज के उद्धार के लिए समाज को सौंपा है। आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी, विभव सागर जी, विनम्र सागर जी, विहर्ष सागर जी जैसे रतन उन्होंने समाज को प्रदान किए हैं।

जिनके माध्यम से आज समाज धर्म मार्ग पर चलते हुए उत्कृष्टता को प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर पंडित अर्पित वाणी, पुलक मंच के प्रदीप बड्जत्या ने विरागसागर जी के प्रति अपने संस्मरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि वर्षायोग 2013 में आचार्यश्री विराग सागरजी का चातुर्मास इंदौर में छत्रपति नगर में पुलक मंच के माध्यम से हुआ था। संचालन महामंत्री गिरीश पाटोदी ने किया। आभार समाज अध्यक्ष कैलाश लुहाडिया ने माना।

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