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धर्म सभा में दिए प्रवचन : अब हम हर चीज मुफ्त में प्राप्त करना चाहते हैं- विहर्ष सागर जी महाराज


 आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज ने गुप्ति सदन जिनालय परिसर, कालानी नगर में अपनी देशना में कहा कि समय कभी भी सबका एक सा नहीं होता। भोग भूमि पर केवल भोग ही भोग है, वहां अन्य कोई कार्य नहीं करना पड़ता। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज ने गुप्ति सदन जिनालय परिसर, कालानी नगर में अपनी देशना में कहा कि समय कभी भी सबका एक सा नहीं होता। भोग भूमि पर केवल भोग ही भोग है, वहां अन्य कोई कार्य नहीं करना पड़ता। किंतु यहां जैसे ही बच्चे हो जाते हैं, हमारी फिक्र बढ़ जाती है, पहले पढ़ाने – लिखने की फिक्र, फिर शादी की फिक्र और अंत में जब वे पढ़-लिख जाते हैं, तो हम बेटे-बेटियों को विदेश भेज देते हैं, जहां पहले न कभी हम गए, न बच्चे गए और शान से समाज को बताते हैं कि हमारे बच्चे विदेश में नौकरी कर रहे हैं। हमने उन्हें अकेला वहां छोड़ दिया और एक दिन वह भी अजैन लड़के या लड़की से शादी करके वहीं के होकर रह जाते हैं। पहले तुमने उन्हें छोड़ा था, अब वह तुम सबको छोड़ देते हैं।

आज हर व्यक्ति है परेशान

आचार्य श्री कहा कि पहले हम लोग स्वाभिमान से जीते थे। अब हमारी मानसिकता बदल गई। अब हम हर चीज फ्री में ढूंढते हैं। एक बुंदेलखंडी कहावत के उदाहरण से उन्होंने कहा कि अम्मा देवें खावे को, तो पुत्र क्यों जावें कमावे को… आचार्य श्री ने कहा कि अब धर्म भी फ्री में करने की चाहत हो गई है। हमारी सोच बदल गई है। मंदिर जाते हो तो धोती दुपट्टे भी वहीं के, द्रव्य सामग्री भी मंदिर जी का, यहां तक कि चढ़ाने वाले चावल भी इधर से उठाकर उधर चढ़ा देते हो, फिर तुम्हें फल कहां से मिलेगा? दान दिए हुए पैसे यानी निर्माल्य का उपयोग करोगे तो हमें पुण्य कहां से मिलेगा। इसीलिए समाज में धनाढ्य लोग कम हो गए। आप जैन हो, जैन के पास कभी पेन (दुख-दर्द) नहीं होता था, आज हर व्यक्ति परेशान दुखी है। मैना सुंदरी ने एक विधान के माध्यम से 700 कुष्ठ रोगियों का रोग ठीक कर दिया था। आपने आज तक कितने विधान कर लिए, क्या हुआ? यह पार्श्वनाथ महा अर्चना ऐसी होगी, जिसमें सब लोग कुछ ना कुछ सहयोग राशि देकर ही बैठेंगे। गुरु देव ने कहा कि धर्म के क्षेत्र में कोई भी कार्य फ्री में मत करना। मंच पर विराजित मुनि श्री विजयेश सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्व हर्ष सागर जी महाराज ने आठ द्रव्यों से आचार्य श्री संसघ की पूजा की। धर्म सभा का संचालन पंडित अशोक शास्त्री ने किया एवं आभार उषा पाटनी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर राकेश गोधा, राजेश वेद, ऋषभ पाटनी, संदीप पहाड़िया सहित सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित थे।

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