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धर्मसभा में दिए प्रवचन : सारी दुनिया कैसी हो जाए, तुम कोयले की खदान में हीरे जैसे बनो – मुनि सुधासागर महाराज


हरि पर्वत स्थित महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। इस अवसर पर निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कोयले की खदान में हीरा सफेद कैसे रह गया। इसी प्रकार सारी दुनिया गंदी बनी रहने दो, बस तुम अपने मन को पवित्र कर लो, कोई तुम्हें काला नही कर सकता। पढ़िए राहुल जैन की विशेष रिपोर्ट…


आगरा। हरि पर्वत स्थित महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ, जिसमें श्रावक परिवार ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर मुनिश्री को शास्त्र समर्पित किए। मंच का संचालन मनोज जैन ने किया। इस अवसर पर निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कोयले की खदान में हीरा सफेद कैसे रह गया। इसी प्रकार सारी दुनिया गंदी बनी रहने दो, बस तुम अपने मन को पवित्र कर लो, कोई तुम्हें काला नही कर सकता।

अपने को कोसना बंद करो

उन्होंने कहा कि कभी न कभी व्यक्ति को अपने आप में अच्छेपने की अनुभूति होती है, चौबीस घंटे में कभी न कभी ऐसा लगता है कि मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं। जब-जब हमें अपने जीवन मे ऐसा महसूस हो, उन क्षणों को सुरक्षित कर लेना क्योंकि हीन भाव की अनुभूति ज्यादा होती है, अहोभाग्य की अनुभूति हमें कम होती है। कई बार तो हम दुर्भाग्य को ही अहोभाग्य समझ लेते है, लेकिन सच्ची अनुभूति कभी धर्म करते समय, कभी अच्छे लोग जब तुम्हारी प्रशंसा कर रहे हों, तब होती है। तुम अपने आप को धन्य मान रहे हो एक बात, तुम्हें पाकर कोई दूसरा धन्य मान रहा है दूसरी बात है, ये दो चीजें हमारी जिंदगी की अनमोल निधि हैं। समयसार पढने के बाद अपने आपको कोसना बंद करो, अपने आप को शाबाशी देना शुरू करो, अपने आप को सौभाग्यशाली मानना शुरू करो।

दुर्भागियों से घटता है मंदिर का अतिशय

कार्य करना अलग चीज है, कार्य तो मजदूर भी करता है, पैर तो मजदूर भी दबा सकता है लेकिन एक बेटा पैर दबाता है अपने पिता के तो वह मजबूर होकर नहीं अहोभाग्य होकर दबाता है। मंदिर तो सभी आते हैं। कई दुर्भाग्य लेके आते हैं, जितने दुर्भागी मंदिर आएंगे, मंदिर का अतिशय घटेगा और मंदिर का अतिशय जितना घटेगा, उतना ही तुम्हारे लिए नुकसानदायक है। हम हमेशा बड़ों को दुर्भाग्य के समय स्वीकार करते हैं, अपने आप में हमें फीलिंग होती है कि मैं दुर्भाग्यशाली हूं, भगवान को, गुरु को देखकर लगता है कि मैं असंयमी हूँ, अच्छी आंखों वाले को देखकर लगता है कि मैं अंधा हूं। ये जो हमारी फीलिंग है ये नकारात्मक फीलिंग कहलाती है, ये दीन, हीन व्यक्ति के लिए होती है जब किसी से सहारा लेना हो। क्योंकि हम जितने दीन – हीन होंगे, सामने वाला उतना ही द्रवीभूत होगा।

नारियल जैसा बनें

कोई भी पर वस्तु पर नजर हमारी जाती है, हमारा कर्ज और खर्च बढ़ जाता है। हम कर्जों में इतने डूबते जा रहे है क्योंकि पग पग पर हम दूसरों के बिना नहीं जी पा रहे हैं। हमारे ऊपर कर्मों का कर्जा लगता जा रहा है क्योंकि हम बिना पुण्य के नहीं जी पा रहे हैं, हम बिना पुण्य के नहीं हंस पा रहे हैं। नारियल को श्रीफल क्यों कहते हैं, फल तो सभी है, सभी फल मीठा खाते हैं, मीठा बनते हैं और खारा पानी हो तो सब फल सूख जाते हैं। संसार मे एक फल ऐसा है जो खारा पानी पीता है और मीठा पानी बना देता है इसलिए इसको श्रीफल बोलते हैं। मीठा खाकर मीठा हुए तो क्या माना, समुद्र के किनारे जितने नारियल होते हैं, सबसे अच्छे मीठे नारियल होते हैं। इससे शिक्षा लेना है कि हमें वो चीज चाहिए जो सबसे ज्यादा निकृष्ट हो, सबसे ज्यादा कष्टदायी हो, उन कष्टों में हम हंसके दिखाएं तो हमारा नाम भी श्रीचन्द्र हो जाये। हम चाहते हैं कि अच्छे सुख के दिनों में हम हंस जाएं, नहीं, हमें वो कला सीखनी है जो कला दुनिया का आज भी वैज्ञानिक नहीं कर पायेगा। कोयले की खदान में हीरा सफेद कैसे रह गया ये समझ में नहीं आया। इसी प्रकार हम संसार के कोयले में रह रहे हैं, संसार की गन्दगी में रह रहे हैं। सारी दुनिया गंदी बनी रहने दो, बस तुम अपने मन को पवित्र कर लो, कोई तुम्हें काला नहीं कर सकता।

ये रहे मौजूद

धर्म सभा में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या, मनोज जैन बाकलीवाल, नीरज जैन जिनवाणी, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन, राजेश सेठी, अमित जैन बॉबी, राजेश जैन गया वाले, विवेक बैनाड़ा, शैलेंद्र जैन, अनिल जैन, समकित जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन, शुभम जैन सहित जैन सकल समाज के लोग मौजूद थे l

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